
बीना. क्षेत्र में खरीफ फसल की बोवनी शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक किसानों को डीएपी खाद उपलब्ध नहीं हो पाया है। ई-टोकन पर भी कम मात्रा ही खाद उपलब्ध हो रहा है। साथ ही सोयाबीन का सरकारी बीज भी अभी तक नहीं आया है, जिससे किसान परेशान हैं और बाजार से अप्रमाणित बीज खरीद रहे हैं।
जानकारी के अनुसार करीब 55 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसल की बोवनी होगी और जिन क्षेत्रों बारिश तेज हो गई है, वहां करीब 15 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है, लेकिन अभी तक सरकारी सोयाबीन का बीज नहीं है। कृषि विभाग में सिर्फ 38 क्विंटल आइपीयू 13-1 उड़द का बीज आया था, जो नकद में किसानों को 10 हजार 500 रुपए क्विंटल में दिया गया है। साथ ही सोमवार तक उड़द का बीज फिर से आने की संभावना है और अरहर का बीज भी योजनांतर्गत आना है। सोयाबीन का बीज किसान पुराना उपयोग कर रहे हैं या फिर बाजार से अप्रमाणित बीज खरीदने मजबूर हैं।
खाद की हो रही किल्लत
किसान डीएपी खाद की मांग कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय से डीएपी उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में टीएसपी, एसएसची और एनपीके खाद उपलब्ध है, जो ई-टोकन के माध्यम से मिल रहा है। ई-टोकन के कारण किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं हो रहा है। इसलिए कुछ किसान यूपी से खाद लाने मजबूर हैं। क्योंकि खाद की कमी के चलते बोवनी प्रभावित होगी।
फसल विविधिकरण अपना रहे किसान
किसान फसल विविधिकरण और कृषि नवाचार अपना रहे हैं। इस वर्ष किसानों ने करीब सवा सौ एकड़ में औषधीय फसलों की बोवनी की है, जिसमें चिया सीड, ईरानी अकरकरा, रोजेल, चिरायता आदि फसलें शामिल हैं। यह फसलें कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली हैं। इसके अलावा ज्वार, उड़द का रकबा भी बढ़ेगा। धान, मक्का, सोयाबीन का रकबा पिछले वर्ष से कम रह सकता है। तिली की बोवनी भी किसान करेंगे।
उड़द का बीज कराया गया है उपलब्ध
कृषि विभाग में उड़द का बीज आया था, जो किसानों को नकद में उपलब्ध कराया गया है। साथ ही सोमवार तक उड़द का बीज और आ सकता है। सोयाबीन बीज अभी तक नहीं मिला है। इस वर्ष क्षेत्र के किसान फसल विविधिकरण अपनाते हुए औषधीय फसलों की बोवनी कर रहे हैं और नवाचार अपना रहे हैं।
अवधेश राय, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, बीना