28 जून 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बीपीसीएल प्रबंधन की दोहरी नीति का विरोध: कंपनियों को दिया जा रहा लाभ, किसानों को अधिकारों से रखा जा रहा वंचित

सर्वदलीय संगठन ने की प्रेसवार्ता, कहा नो-डेवलपमेंट जोन किया जाए खत्म या फिर किसानों को भी दी जाए निर्माण करने की अनुमति
2 min read
Google source verification
Protest against BPCL management's double standards

प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए। फोटो-पत्रिका

बीना. बीपीसीएल रिफाइनरी प्रबंधन की दोहरी नीति के खिलाफ सर्वदलीय संगठन ने शनिवार को प्रेसवार्ता की। संगठन ने नो-डेवलपमेंट जोन खत्म करने की मांग को लेकर आगे आंदोलन करने की चेतावनी दी है। क्योंकि दोहरी नीति के चलते कंपनियों को लाभ दिया जा रहा है और किसानों को निर्माण करने से रोका जा रहा है।
सौरभ आचवल ने बताया कि यह लड़ाई सिर्फ नो-डेवलपमेंट जोन हटाने और क्षेत्रीय नियंत्रण विकास समिति के क्रियाकलापों को लेकर है। वर्ष 2009 के आदेशानुसार एक किमी का निषिद्ध क्षेत्र है और पांच किलोमीटर नो-डेवलपमेंट जोन है, जिसमें 52 गांव हैं। निषिद्ध क्षेत्र में कंपनियों ने प्लांट लगाए हैं और निर्माण किए हैं, जबकि इस क्षेत्र में जाने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती है। इसके बाद भी कंपनियों को लाभ मिला, लेकिन किसानों को अधिकारों से वंचित रखा गया। इस क्षेत्र में अनुमति लेने के लिए समिति गठित की थी, जिसमें एसडीएम अध्यक्ष हैं और इसके अलावा एसडीओपी, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीइओ, सीमएओ, रिफाइनरी प्रबंधन से एक अधिकारी, ग्राम निवेश प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन इसमें कोई जनप्रतिनिधि शामिल नहीं हैं, जो जनता की आवाज उठा सकें। इस मामले को लेकर दिल्ली तक जाएंगे। वहीं, एसडीएम दो बार प्लांट, कॉलोनी हटाने नोटिस दे चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ है। इसलिए अब संगठन द्वारा तहसील में ही प्रदर्शन किया जाएगा।

पीएम आवास तक नहीं बना पा रहे ग्रामीण
लोकेन्द्र सिंह देहरी ने बताया कि नो-डेवलपमेंट जोन में पीएम आवास भी नहीं बना पाते हैं। यदि कोई निर्माण करता है, तो सुरक्षा गार्ड काम रुकवाने पहुंच जाते हैं। यदि फिर भी काम नहीं रुकता है, तो तहसील में शिकायत होती है और नोटिस जारी होता है। साथ ही खेत में टीनशेड भी नहीं लगा सकते हैं। जबकि रिफाइनरी की टाउनशिप, पेट्रोल पंप, शराब दुकान रिफाइनरी के पास ही हैं। इंदरसिंह ने कहा कि बीना का कोई विकास नहीं हुआ है और किसान परेशान हैं। इसका विरोध करेंगे। आशुतोष तिवारी ने भी इस नियम को खत्म करने की बात कही।

ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह हो रहा काम
जनपद उपाध्यक्ष अमरप्रताप सिंह देहरी ने कहा कि दिया तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। क्योंकि नियम के तहत अंधेरा बीना में ही है। किसान कोई कार्य नहीं कर सकते हैं और कंपनियां कार्य कर रही हैं। यह नियम क्षेत्र के लिए अभिशाप बन गया है और ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह काम कर रही हैं। अधिकारी उनके इशारे पर कार्य कर रहे हैं। साथ ही सालों से, जो अधिकारी रिफाइनरी में जमे हैं, उनके खिलाफ भी बीपीसीएल के अधिकारियों को पत्र लिखकर हटाने की मांग की जाएगी। शिवकुमार ठाकुर देहरी ने कहा कि रिफाइनरी को किसानों से खतरा है जैसे किसान आंतकवादी हैं और कंपनियों से खतरा नहीं है। कैलाश ठाकुर पार ने कहा कि रिफाइनरी में जो लोग काम कर रहे हैं, उन्हें पूरा वेतन नहीं मिल रहा है। शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

प्रशासन से पूछे यह सवाल
संगठन ने प्रशासन से सवाल पूछे हैं कि समिति में जनप्रतिनिधि क्यों शामिल नहीं हैं, समिति की बैठक कब होती है, अन्य रिफाइनरी में यह नियम लागू नहीं हैं, तो बीना में क्यों? यदि किसानों को कुछ नहीं करने देना हैं, तो उनकी जमीन अधिग्रहण कर लें।