सागर

kisan diwas 2017 : किसानों के लिए योजनाएं तमाम, फिर भी फसल की पैदावार स्थिर रहने से हैरान

जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते कर्ज में डूब रहे किसान

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Dec 23, 2017

सागर. किसानों को समृद्ध बनाने और खेती को लाभ का धंधा बनाने केंद्र व राज्य शासन भले ही दर्जनों योजनाएं चला रहे हों, लेकिन स्थानीय जिम्मेदारों की अनदेखी तमाम योजनाओं पर भारी पड़ती नजर आ रही है। न तो योजनाओं का पर्याप्त प्रचार-प्रसार हो रहा है और न ही योजनाओं का लाभ देने के लिए अफसर प्रयास कर रहे हैं। यही कारण है कि योजनाओं की जानकारी के अभाव में किसान आज भी परंपरागत खेती में ही दिन-रात मेहनत करने में जुटा हुआ है। नतीजा कि बीते चार साल से जिले में उपज की पैदावार स्थिर होकर रह गई है, जिसके कारण किसान कर्ज में डूबता चला जा रहा है।

यहां हाल बेहाल
मृदा परीक्षण कार्ड केंद्र सरकार द्वारा किसानों को समद्ध बनाने और पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने की शुरुआत की है, इससे किसानों को अपने खेत की मिट्टी में उपस्थित पोषक तत्वों की जानकारी मिलेगी, जिसके बाद वह आवश्यकतानुसार खाद का उपयोग कर सकेगा, लेकिन जिले में यह कार्ड किसानों को साल बाद भी नहीं मिल पा रहे हैं।

बाजार में बिकने वाले कीटनाशक व खाद-बीज के उपयोग से किसानों को नुकसान न हो, कोई अमानक चीज किसानों तक न पहुंचे सके, इसके लिए सीजन के पहले बाजार से नमूने लेकर खाद, बीज व कीटनाशक का प्रयोगशाला में परीक्षण कराना होता है, लेकिन जिले में यह परीक्षण तब किया जाता है, जब किसान उसका उपयोग कर लेते हैं। हैरत की बात तो यह है कि हर साल उर्वरक के साथ बीज व कीटनाशक भी आमनक पाए जाते हैं।

शासन स्तर पर जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में प्रदेश
की अपनी जैविक कृषि नीति भी बनाई। इतना ही नहीं कृषि विज्ञान केंद्र सागर के वैज्ञानिकों ने भी यह बात मानी है कि रासायनिक खादों से बर्बाद हुई खेती को बचाने का एक मात्र तरीका जैविक खाद ही है, इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति वापस लौट सकती है। इसके वाबजूद भी विभाग की ओर से जैविक खेती को बढ़ावा देने कोई विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। मिट्टी स्वास्थ्य, मिट्टी संरक्षण एवं उर्वरक, बीज, सिंचाई, किसानों के लिए प्रसार एवं प्रशिक्षण, मशीनीकरण और प्रौद्योगिकी, कृषि ऋण, कृषि बीमा, पौध संरक्षण, बागवानी, कृषि विपणन, यह सभी राष्ट्रीय योजनाएं हैं। जैविक खेती प्रोत्साहन योजना, सिंचाई क्षमताओं का विकास, महिलाओं की भागीदारी योजना, कृषि अभियांत्रिकी, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण के अलावा मप्र सरकार भी किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है।

विभाग द्वारा कोई आयोजन तक नहीं
आमतौर पर यह देखने में आता है कि विभाग अपने क्षेत्र से जुड़े विशेष दिवस पर आयोजन करता है, लेकिन कृषि विभाग एक एेसा विभाग है जो शनिवार को राष्ट्रीय किसान दिवस के दिन जिले भर में कोई भी आयोजन नहीं कर रहा है। हैरत की बात तो यह है कि विभाग के अधिकारी जानकारी होने के बाद भी अन्य आयोजन करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। यह जानकारी स्वयं विभाग के संयुक्त संचालक एके नेमा से बात करने पर मिली।

शासन द्वारा दर्जनों योजनाएं संचालित की जा रहीं हैं, लेकिन जिले में किसानों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। इस बात को लेकर किसान संघ ने कई बार प्रदर्शन और किसान हित में काम किए हैं। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण आज किसान परेशान है।
मेहरबान सिंह, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संघ

Published on:
23 Dec 2017 04:32 pm
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