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दो साल पहले 90 हेक्टेयर में रोपे गए थे एक लाख पौधे, सैकड़ों पौधे हुए खराब, जंगली जानवर भी पहुंचा रहे क्षति

बीपीसीएल बीना रिफाइनरी प्रबंधन ने ग्रीन वेल्ट बनाने वन विभाग की जमीन पर कराया है पौधारोपण, जिससे प्रदूषण हो सके कम

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Two years ago, 100,000 saplings were planted across 90 hectares, hundreds of which have been damaged, and wild animals are also causing damage

रोपे गए पौधे हुए खराब, सिर्फ गड्ढे आ रहे नजर। फोटो-पत्रिका

बीना. बीपीसीएल बीना रिफाइनरी विस्तार के चलते परिसर में लगे पेड़ों को काटा गया है और इसके बदले प्रबंधन ने वन विभाग के साथ अनुबंध कर वन विभाग की 90 हेक्टेयर जमीन पर करीब एक लाख पौधे दो वर्ष पहले रोपे हैं। पौधा रोपने, सुरक्षा के लिए सीएसआर के तहत राशि दी गई थी और अब देखरेख के लिए भी प्रबंधन द्वारा राशि दी जाती है, लेकिन फिर भी पौधे हरेभरे नहीं हो पाए हैं।
जुलाई 2024 में यहां पौधारोपण किया गया था, जिसमें फलदार पौधे ज्यादा लगाए गए हैं। यहां लगे सैकड़ों पौधे सूख गए हैं या जंगली जानवरों ने खराब कर दिए हैं, जो पौधे लगे हैं वह भी हरेभरे नजर नहीं आ रहे हैं। यदि यही स्थिति रही, तो ग्रीन वेल्ट तैयार होता नजर नहीं आ रहा है। पौधों को सुरक्षित रखने के लिए चारों तरफ सुरक्षा जाली लगाई गई है, लेकिन फिर भी नील गाय सहित अन्य जानवर अंदर पहुंचकर पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस ओर रिफाइनरी प्रबंधन के अधिकारियों को भी ध्यान देने की जरूरत है। यदि यही स्थिति रही, तो जो पौधे अभी नजर आ रहे हैं कुछ महीनों बाद वह भी खराब हो जाएंगे और पौधारोपण पर खर्च किए गए लाखों रुपए बर्बाद हो जाएंगे।

गर्मी में सिर्फ एक बार दिया जाता है पानी
पौधों की संख्या ज्यादा होने के कारण गर्मी के मौसम में सिर्फ एक बार पानी दिया जाता है। करीब दो सौ टैंकरों से पानी दिया जाता है। जबकि गर्मी में एक बार पानी देना पर्याप्त नहीं है। पौधारोपण के समय ही यदि ड्रिप वॉटर सिस्टम लगाया जाता, तो आज पौधों की यह स्थिति न होती। पौधों के रखरखाव के लिए हर वर्ष रिफाइनरी प्रबंधन करीब 15 से 20 लाख रुपए वन विभाग को देता है।

जंगली जानवर पहुंचा रहे क्षति
जंगली जानवर पौधों को क्षति पहुंचा रहे हैं। इस संबंध में रिफाइनरी के अधिकारियों को जानकारी दी गई है और वह निरीक्षण कर चुके हैं। जंगली जानवरों को रोकने के लिए योजना बनाने की चर्चा की गई है। साथ ही जो पौधे खराब हो जाते हैं उनकी जगह जुलाई माह में नए पौधे रोप दिए जाते हैं।
सुनील गौतम, डिप्टी रेंजर, बीना