गोविंदा आला रे... जरा मटकी संभाल ब्रजबाला.. नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैयालाल की हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की.... मैया मोहे में नहीं माखन खायो... के भजनों पर मंदिरों में भक्त झूम उठे। शनिवार को कृष्ण मंदिरों में रात 12 बजे धूमधाम से जन्माष्टमी महोत्सव मनाया गया।
घर-घर मनाया गया जन्मोत्सव, मंदिरों में शाम से ही लगी भक्तों की कतार, सुबह भगवान का हुआ पंचामृत अभिषेक
सागर . गोविंदा आला रे... जरा मटकी संभाल ब्रजबाला.. नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैयालाल की हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की.... मैया मोहे में नहीं माखन खायो... के भजनों पर मंदिरों में भक्त झूम उठे। शनिवार को कृष्ण मंदिरों में रात 12 बजे धूमधाम से जन्माष्टमी महोत्सव मनाया गया। सुबह से मंदिरों और घरों में कृष्ण जन्म की तैयारियां शुरू हो गई थीं। भगवान कृष्ण का जगह-जगह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पंचामृत से अभिषेक किया गया। घर पर पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचे। शाम होने पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। रात 11 बजते ही भगवान के विशेष श्रृंगार के लिए मंदिरों के पट बंद हो गए और ठीक 12 बजते ही पट खुले और बैंड बाजों के जन्मोत्सव मनाया गया। भगवान के श्रृंगार को देखने के लिए भक्त उमड़े। रात में कृष्ण दर्शन व आरती के बाद बधाई उत्सव हुआ। मंदिरों में रात्रि 12 बजे बड़ी संख्या भक्तों की कतार लगी।
मिनी वृंदावन में रही धूम
मिनी वृंदावन कहे जाने वाले बड़ा बाजार स्थित देव अटल बिहारीजी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, गेड़ाजी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, रामबाग मंदिर, गोपालजी मंदिर और गोपालगंज स्थित वृन्दावन बाग मंदिर में भगवान का विशेष श्रृंगार हुआ। बामोरा स्थित रुद्राक्ष धाम में जन्माष्टमी के अवसर पर फूल बंगला सजाया गया। विभिन्न प्रकार के फूलों से भगवान का श्रृंगार किया गया। यहां भगवान को 56 प्रकार के भोग लगाए।
रात 12 बजे हुई आरती
द्वारकाधीश मंदिर में रात्रि 9 बजे से भजन संध्या शुरू हुई। 11.45 बजे ठाकुर जी का अभिषेक हुआ। रात्रि 12 बजे जन्म उत्सव मनाया गया। 12.15 बजे से मटकी फूटी और प्रसाद वितरण हुआ। वहीं लक्ष्मीनारायण मंदिर में भगवान राधा कृष्ण का नई पोशाक और आभूषणों से श्रृंगार हुआ। गेंदा, गुलाब व बेला के फूलों से गर्भगृह की सजावट की गई।
राधे-राधे संकीर्तन मंडल ने दी भजनों की प्रस्तुति
लक्ष्मीपुरा स्थित देव गोपाल मंदिर में 6 दिवसीय नंद महोत्सव मनाया जा रहा है। शनिवार को सुबह 9 बजे पंचामृत अभिषेक हुआ। रात्रि में 9 बजे से राधे-राधे संकीर्तन मंडल ने भजनों की प्रस्तुति दी। रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव की महाआरती हुई। 17 अगस्त को मंदिर परिसर में मटकी फोड़ प्रतियोगिता होगी। 18 अगस्त को बधाई गायन और 20 अगस्त को बधाई उत्सव होगा।