
हनुमान दुर्गा भैरव धाम के पास में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन पं. अरविंद भूषण महाराज बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म दिन पर गोकुल में नंदबाबा के द्वारा जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया।
जब कंस को मालूम हुआ कि मुझे मारने वाले ने जन्म ले लिया है। तब उसने पूतना को जन्म लेने वाले बच्चे का पता लगाकर मारने के लिए भेजा, पूतना भगवान श्रीकृष्ण के पास बड़ा ही सुंदर रूप बनाकर उन्हें मारने गई। पूतना ने भगवान श्रीकृष्ण को दूध पिलाते समय स्तन में जहर लगाकर दूध पिलाने लगी, भगवान पूतना के भाव को समझ जाते हैं। गोकुल क्षेत्र में उस समय जितने भी बालक जन्म लिए थे उनको एक-एक कर पूतना द्वारा वध किया गया। भगवान ने इन राक्षस का भी उद्धार किया। नंदबाबा के कुलगुरु ने भगवान श्रीकृष्ण को विषयोग बताया था, इसलिए मोर सर्प का दुश्मन है एवं यह निष्काम भी है। ब्रह्मा ने ग्वाल वालों को जब भगवान श्रीकृष्ण के साथ झूठा भोजन खाते देखा तब उन्होंने ग्वाल व गाय बछड़ों सहित हरण कर ब्रह्म लोक ले गए जब भगवान श्रीकृष्ण ने ध्यान कर देखा तब उन्हें सारी स्थिति ज्ञात हुई। भगवान ने जैसे गाय बछड़ा, ग्वाल वाल का हरण हुआ था वैसे ही उतने ही रूप बना लिए और ब्रह्मा को उत्पन्न हुए भ्रम को दूर किया। यह स्थिति एक वर्ष तक चलती रही।
आगे कथा में बताया गया कि ग्वालबाल, नंदबाबा सभी दीपावली के बाद गोवर्धन पर्वत पर इंद्र पूजन के लिए एकत्रित हुए। तब भगवान ने पूछा यह पूजन किस का किया जा रहा है। तब सभी ने बताया कि इन्द्र का पूजन प्रतिवर्षानुसार किया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने गिरीराज पूजन के लिए सभी को राजी किया एवं गोवर्धन नाथ का पूजन कराया गया एवं 56 भोग गिरीराज महाराज को लगाए गए कथा में मूलपाठ अभिनय दुबे एवं आचार्य आशीष चौबे, जाप पर नितिन दुबे, रोहित मिश्रा, अनुज शास्त्री, बद्रीप्रसाद मिश्रा, कथा के आयोजक गोपाल प्रसाद शर्मा है। कथा में डीके तिवारी, डीके सेन, केके तिवारी, एनडी दुबे, रामू दुबे, अजय गर्ग, जेपी भटेले राजकुमार रैकवार, अनिल रैकवार, कामता पटेल, लल्लू राम सहित अनेकों श्रद्धालु उपस्थित थे। उक्त जानकारी केके तिवारी ने दी।
Published on:
05 Jan 2026 04:58 pm
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