संतान की जान पर बनी तो शक्ति बनकर सामने आ रहीं मां सागर. बेटा-बेटी की जान पर बने तो बुंदेलखंड क्षेत्र की माताएं शक्ति बनकर सामने आतीं हैं। संतान की जान बचाने वह अपने अंग देने में भी पीछे नहीं रहतीं। नया मामला तिली क्षेत्र का है जहां मंजु केशरवानी नाम की मां ने अपने […]
सागर. बेटा-बेटी की जान पर बने तो बुंदेलखंड क्षेत्र की माताएं शक्ति बनकर सामने आतीं हैं। संतान की जान बचाने वह अपने अंग देने में भी पीछे नहीं रहतीं। नया मामला तिली क्षेत्र का है जहां मंजु केशरवानी नाम की मां ने अपने 22 वर्षीय बेटे की जान बचाने एक किडनी दे दी और महंगे ऑपरेशन के बाद परिवार चलाने संघर्ष कर रहीं हैं। हालांकि मंजु के भाई, परिजन व अन्य महिलाएं भी सहयोग कर रही हैं लेकिन एक के बाद एक आ रहीं परेशानियों से निजात नहीं मिल रही है।दरअसल, मंजु केशरवानी का बेटा बीकॉम का छात्र था, बीमार रहने पर जब 25 अक्टूबर 2023 को नागपुर में दिखाया तो पता चला कि बेटा की किडनी खराब हो गईं हैं। जान बचाने के लिए मंजु ने पूरी कागजी कार्रवाई की। ऑपरेशन के पैसे एकत्रित किए, रिश्तेदारों, भाईयों और अन्य महिलाओं के सहयोग से पैसे जुटाए और भोपाल जाकर 9 जनवरी को किडनी ट्रांसप्लांट हुई। ऑपरेशन के बाद मां-बेटा स्वस्थ हैं लेकिन दवाइयां जीवन भर के लिए बंध गईं हैं। मंजु के पति शहर में छोटा-मोटा बिजनेस करते हैं लेकिन अब वह बिजनेस भी नहीं है।
इसी तरह का दूसरा केस सिरोंजा का है। जहां 25 वर्षीय मोहित राजपूत की विगत वर्ष दोनों किडनी खराब हो गईं थीं। 25 वर्षीय जवान बेटे की जान आफत में थी, फिर मां ने अपनी एक किडनी देकर बेटे की जान बचाई।विगत वर्ष 2023 में मेडिकल बोर्ड ने 16 किडनी ट्रांसप्लांट के केस में मंजूरी दी थी, जिसमें से 5 मामलों में मां ने अपनी संतान को किडनी देकर जान बचाई। इसमें सागर ही नहीं, छतरपुर, टीकमगढ़ जिले के केस भी शामिल हैं। इस वर्ष चार माह में किडनी ट्रांसप्लांट के 7 केस को मंजूरी दी गई है जिसमें 2 केस में मां ने अपने बेटे को एक किडनी देकर उसकी जान बचाई है।