
घरों तक दूषित पानी... लापरवाही के लीकेज घोल रहे पेयजल में गंदगी
सागर. सीवर-गंदगी से युक्त पेयजल इंदौर में जानलेवा हो गया। सागर में भले ही जिंदगी का संकट नहीं हुआ हो, लेकिन पेयजल आपूर्ति में लापरवाही के लीकेज गंदगी घोल रहे हैं। शहर की पाइपलाइन में 80 से अधिक लीकेज हैं, जिनमें से 40 से अधिक लीकेज ऐसी जगहों पर हैं जहां सीवर लाइन है या फिर नाली-नाले गुजर रहे हैं। यही वजह है कि घरों तक दूषित पानी पहुंचने से कोई इनकार नहीं कर पा रहा है।
सागर शहर में पेयजल आपूर्ति में गड़बड़ी का खुलासा इंदौर की घटना के बाद हुआ। प्रशासन अलर्ट मोड पर आया और आनन-फानन में पेयजल लाइन की जांच कराई गई। कलेक्टर और निगमायुक्त खुद भी अलर्ट हुए और एमपीयूडीसी व निगम की जल प्रदाय शाखा के अधिकारी-कर्मचारी और इंजीनियर मैदान में उतारे गए। हालांकि इनका हर दिन पानी की सैंपलिंग करने का दावा है।
शहर का ऐसा कोई वार्ड नहीं है, जहां पर नई व पुरानी लाइन में लीकेज न हो। हर वाई में 12-15 छोटे-बड़े लीकेज हैं। निगम भी मान रहा है कि पाइपलाइन में 80 से अधिक लीकेज हैं, जिन्हें सुधारा जा रहा है। वहीं नलों से गंदा पानी सप्लाई होने की 3-4 शिकायतें रोज आ रहीं हैं।
शहर में 2 से 3 वार्ड ऐसे हैं जहां सप्लाई शुरू होने के 5 मिनट तक गंदा पानी निकलता है। शहर के पॉश इलाके सिविल लाइन और तिली क्षेत्र में जल सप्लाई होने के शुरुआती 5 मिनट तक गंदा-पीला पानी आता है। इसकी शिकायतें भी होती हैं। चूंकि जल प्रदाय व्यवस्था पूरी तरह से टाटा एजेंसी को सुपुर्द हो गई है इसलिए जल प्रदाय शाखा के अधिकारी टाटा एजेंसी को सभी शिकायतें फॉरवर्ड करते हैं। फॉलोअप में गंभीरता नहीं है।
पहले बांध के पानी को फिल्टर प्लांट में लाया जाता है। यहां टाटा एजेंसी के केमिस्ट अभी लीगल नॉर्म्स के हिसाब से ब्लीचिंग पाउडर व सोडियम हाइपोक्लोराइट से पानी को साफ करते हैं ताकि बैक्टीरिया और कीटाणु मर जाएं। फिर फिटकरी से पानी में मौजूद गंदगी को अलग किया जाता है। केमिस्ट सुबह-शाम पानी की जांच का दावा करते हैं। लेकिन फिल्टर प्लांट के बाद टंकियों और फिर डिस्टि्रब्यूशन लाइन से होता हुआ पानी सप्लाई एंड यानी घर में नलों तक पहुंचता, इस दौरान जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। इस सवाल के बाद अब वाल्व मैन को अलग-अलग एरिया में अलग-अलग समय पर पानी की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
शहर में सीवर नेटवर्क के लिए अमृत योजना के तहत 221 किमी की सीवर लाइन का जाल बिछाया गया है। 4 जोन में बंटे इस प्रोजेक्ट में करीब 28500 हाउस होल्ड कनेक्शन भी किए गए हैं। पुरव्याऊ, शनिचरी वार्डों के कुछ चट्टान के इलाकों को छोड़ दें तो प्राय: सभी जगह सीवर लाइन डाली गई है। इसी सीवर लाइन के पास टाटा एजेंसी ने भी शहरभर में 325 किमी लाइन डालकर 66190 नल कनेक्शन दिए हैं। दोनों ही कार्य 2017 से 2024 तक एक ही टाइम पीरियड में हुए। चूंकि शहर में चौड़ी सड़कों का अभाव है, लिहाजा दोनों लाइनें आसपास ही बिछाई गईं हैं। दोनों ही लाइनों में लीकेज की समस्या भी है।
कलेक्टर संदीप जीआर ने जिलेभर के नगरीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि पाइप लाइनों की जांच, मरम्मत, प्रतिदिन पानी की जांच कराएं। यदि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है तो मरम्मत कराई जाए। सुधार होने तक टैंकर या अन्य सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था से लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाए। दूषित पानी से जुड़ी किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच और सुधार किया जाए। अधिकारी हर माह के पहले सप्ताह में यह बताएंगे कि उनके क्षेत्र में कोई पाइपलाइन क्षतिग्रस्त नहीं है और कहीं भी दूषित पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है।
टाटा एजेंसी राजघाट बांध से हर दिन करीब 83 एमएलडी (मिलियन लीटर) पानी उठा रही है। करीब 7-8 एमएलडी पानी अभी भी नए आरटीओ के पास डुगडुगी पहाड़ी स्थित ब्रैक प्रेशर टैंक तक पहुंचने से पहले ही गायब हो जाता है। 60 एमएलडी पानी रोज शहर में सप्लाई किया जाता है। डुगडुगी पहाड़ी से तिली चौराहे तक पाइप लाइन बदली जा चुकी है। आठ टंकियों की डायरेक्ट लाइन में भी लीकेज सुधार हुआ है, जिससे करीब 2-3 एमएलडी पानी की बर्बादी रुकी है। लेकिन अभी भी वार्डों में छोटे-बड़े लीकेज हैं और आज भी 3-4 एमएलडी पानी बर्बाद हो रहा है।
-80 से अधिक लीकेज मिले, जिसमें आधे से ज्यादा सीवर व नालियों के पास।
-221 किमी सीवर लाइन शहर में
-325 किमी टाटा की नई पेयजल लाइन।
-4 शिकायतें औसत राेज गंदे पानी की आ रहीं।
-2 वार्डों में राेज शुरुआत के 5 मिनट गंदे पानी की सप्लाई।
-लीकेज जांचने के लिए एमपीयूडीसी, टाटा एजेंसी सहित जल प्रदाय शाखा को पत्र जारी कर दिए गए हैं। हम ऐसे लोगों पर भी कार्रवाई करेंगे जो लाइनों को नुकसान पहुंचाते हैं। एक-दो दिन में सभी जगह के लीकेज की जानकारी आने के बाद जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
राजकुमार खत्री, निगमायुक्त।
Published on:
02 Jan 2026 09:03 pm
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