बड़े तो दूर छोटे काम की भी नहीं रखी जा सकी आधारशिला
सागर व नरयावली विधायक ने आचार संहिता लगने के पहले श्रेय लूटने आनन-फानन में किया था भूमिपूजन
सागर. आचार संहिता प्रभावी होने के पहले विधायकों ने वोटबैंक के चक्कर में श्रेय लूटने के लिए भूमिपूजन की झड़ी लगा दी थी। इसमें करोड़ों रुपए से होने वाले निर्माण कार्य तो ठीक लाख-दो लाख में निर्मित होने वाली नाली-सड़क को भी नहीं छोड़ा, लेकिन निर्माण कार्य के ठेकेदारों ने माननीयों की इस श्रेय लेने की राजनीति को तबज्जो नहीं दी। यही कारण है कि भूमिपूजन के दो से तीन माह बीतने के बाद भी अब तक एक भी कार्य का श्रीगणेश नहीं हो सका। जबकि माननीयों ने इन कार्यों को स्वीकृत कराने और विकास कार्य की सूची में जोड़कर लोगों से वोट की अपील की है।
होड़ थी विधायकों में
भूमिपूजन करने वालों में सबसे आगे शहर विधायक शैलेंद्र जैन व नरयावली विधायक प्रदीप लारिया सबसे आगे नजर आए। लारिया ने तो श्रेय लूटने के लिए बिजली कंपनी की उस सबस्टेशन का भी शिलान्यास किया था, जिसका आधा निर्माण भी पूर्ण हो चुका था, तो वहीं विधायक जैन ने आधे-अधूरे तैयार सिटी फॉरेस्ट का लोकार्पण कर अपने दस साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनती की थी।
यह किए थे लोकार्पण
सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने प्लेटफार्म नंबर दो के सामने से तिलकगंज जाने वाले मार्ग का ढाई माह पहले किया था भूमिपूजन।
विधायक जैन ने आचार संहिता प्रभावी होने के ठीक एक सप्ताह पहले सिटी फॉरेस्ट का लोकार्पण भी किया था, लेकिन आमजन के लिए वहां आज तक कोई सुविधा नहीं है।
नरयावली विधायक ने क्षेत्र में निर्मित होने वाले शासकीय महाविद्यालय, २८ नंबर रेलवे गेट, सहित क्षेत्र में छोटे-छोटे सड़क निर्माण के भूमिपूजन किए थे। इनमें से एक का भी श्रीगणेश नहीं हो सका।