
बीना. बीना नदी सिंचाई परियोजना की नई सूची में तहसील के 29 गांव शामिल हैं, जहां नहर से पानी पहुंचेगा, जबकि पूर्व में अन्य गांव भी इसमें शामिल थे। इसके विरोध में किसान नेता इंदर सिंह के नेतृत्व किसानों ने तहसील में नारेबाजी करते हुए राज्यपाल के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि बीना नदी सिंचाई परियोजना में ऐसे गांवों को छोड़ दिया गया, जहां खेती असिंचित है और वहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। किसानों द्वारा ट्यूबवेलों का खनन कराया जाता है, पानी नहीं निकलता है। साथ ही आसपास कोई नदी भी नहीं है। यहां किसानों को उम्मीद थी कि नहर गांव में पहुंचने से खेती सिंचित हो जाएगी और उत्पादन अच्छा होने लगेगा, लेकिन तहसील के सिर्फ 29 गांव ही शामिल किए गए हैं। इस योजना में सभी गांवों को जोडऩे की मांग की गई है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी है। ज्ञापन सौंपने वालों में गौरीशंकर, सतीश पटेल, पप्पु यादव, लक्ष्मीनारायण पटेल, जगदीश, विमला अहिरवार आदि शामिल हैं।
15 पंचायत के 29 गांव हैं शामिल
तहसील की 15 ग्राम पंचायतों के 29 गांव इस योजना में शामिल हैं। योजना में आमखेड़ा, बम्होरीशेख, बरदौरा, बेलई, बेथनी, भानगढ़, बिहरना, बुखारा, चमारी, धई बुजुर्ग, ढांड, धनौरा, फुटेरा, गुनगी, गुरयाना, कामाखेड़ी, कनखेरा, करोंदा, खजुरिया, खिरिया भागवती, लशकरपुर, मालखेड़ी, मिर्जापुर, मुडिय़ा देहरा, पंधो, पीपरखेड़ी, पुराजादो, रुसल्ला शेख, तजपुरा को शामिल किया गया है। कुल 12401 हेक्टेयर रकबा सिंचित होगा। तहसील में 64 पंचायतें है और इसमें बहुत बड़ा क्षेत्र छूट रहा है। तहसील में रबी सीजन का रकबा करीब 54 हजार हेक्टेयर है। किसान नेता ने बताया कि देवल गांव पहले शामिल था, जो इस सूची में नहीं है, जबकि वहां पानी की कमी है। 165 गांव में सिर्फ 29 गांवों को शामिल किया गया है।