सागर

पद्मश्री अखाड़ा गुरु ‘दाऊ’ का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार, बेटे व शिष्यों ने बुंदेली मार्शल आर्ट का प्रदर्शन कर दी अंतिम विदाई

Apr 20, 2026
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पद्मश्री के लिए चयनित अखाड़ा गुरु 83 वर्षीय भगवानदास रायकवार 'दाऊ' का शनिवार रात को निधन हो गया। बुंदेलखंड की प्राचीन शस्त्र कला 'अखाड़ा' को वैश्विक पहचान दिलाने वाले 'दाऊ' का अंतिम संस्कार रविवार को सागर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ। अंतिम यात्रा में उनके बेटे राजकुमार रायकवार और दाऊ के शिष्यों ने अखाड़े का विशेष प्रदर्शन किया। पारंपरिक मार्शल आर्ट और लाठी के कौशल का प्रदर्शन कर अखाड़ा गुरु को श्रद्धांजलि दी।
दाऊ को अंतिम विदाई देने बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए। कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देश पर एसडीएम अमन मिश्रा, तहसीलदार संदीप तिवारी ने मुक्तिधाम पहुंचे। उन्होंने प्रशासन की ओर से पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि देकर राष्ट्रध्वज अर्पित किया। पुलिस विभाग ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस मौके पर आरआई आनंद खत्री, नितेश बाइकर, मोतीनगर टीआई जसवंत सिंह राजपूत, कोतवाली टीआई मनीष सिंघल, सुनील तिवारी, अरविंद राजपूत, तेजेंद्र शर्मा, संदीप राजपूत, रवि रजक, सुनील कुमार, भगवानदास अहिरवार, मंजीत व बालकिशन मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पद्मश्री भगवान दास रायकवार की निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित कर दुख व्यक्त किया। परिवार को दुख सहन करने की भगवान से प्रार्थना की। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि दाऊ का निधन सागर ही नहीं संपूर्ण बुंदेलखंड एवं प्रदेश के लिए यह बहुत बड़ी क्षति है।

भोपाल एम्स में चल रहा था उपचार, वहीं ली अंतिम सांस

पद्मश्री भगवान दास का भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। वे पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे और वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रहे थे। उनके बेटे राजकुमार रायकवार ने बताया कि दाऊ को पहले शहर के निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां 17 मार्च से उनका इलाज चल रहा था। हालत में सुधार न होने पर 7 अप्रेल को उन्हें बेहतर उपचार के लिए एम्स भोपाल रेफर किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। राजकुमार ने बताया कि उनके निधन से बुंदेलखंड में बडी़ क्षति हुई है। पिता की विरासत को उनके शिष्य आगे बढ़ाएंगे।

पूरा जीवन अखाड़ा के संरक्षण को किया समर्पित, वही पहचान

भगवानदास रायकवार ‘दाऊ’ जी ने अपना पूरा जीवन बुंदेलखंड की पारंपरिक शस्त्र युद्ध कला ‘अखाड़ा’ के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया। उनके अथक प्रयासों से इस प्राचीन कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 के लिए उन्हें ‘पद्मश्री सम्मान’ के लिए चयनित किया गया था। यह सम्मान उन्हें भारतीय पारंपरिक मार्शल आर्ट और अखाड़ा विद्या के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रशिक्षण में उनके अमूल्य योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा था। अंतिम यात्रा में विधायक प्रदीप लारिया, जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी शैलेश केशरवानी, पप्पू फुसकेले, राजेश केसरवानी, नगर निगम कमिश्नर राजकुमार खत्री, एसडीएम अमन मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

Updated on:
20 Apr 2026 05:20 pm
Published on:
20 Apr 2026 05:20 pm