
अश्वगंधा की फसल दिखाता हुआ युवा किसान। फोटो-पत्रिका
बीना. परंपरागत खेती में आय कम होने से अब युवा किसान उन्नत खेती अपना रहे हैं, जिसमें औषधीय, मसाला फसलें भी शामिल हैं। इन फसलों में कम लागत में बेहतर आय हो रही है। नई सोच और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से ये किसान न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।
नगर के युवा किसान निदान जैन ने अश्वगंधा की खेती शुरू की है और रबी सीजन में उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ में इसकी बोवनी की थी, जिसमें सात क्विंटल उत्पादन हुआ है। नीमच मंडी में अश्वगंधा की कीमत लगभग 20 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रही है, जिससे उन्हें बेहतर मुनाफे की उम्मीद है। अश्वगंधा एक औषधीय फसल है जिसकी मांग आयुर्वेदिक दवाओं में लगातार बढ़ रही है, इसलिए इसकी खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।
देहरी के युवा किसान ने की कलोंजी की खेती
देहरी के युवा किसान सुयश ठाकुर ने भी पारंपरिक खेती छोडकऱ कलोंजी की खेती अपनाई है। उन्होंने 6 एकड़ क्षेत्र में कलोंजी की बोवनी की थी, जिसमें प्रति एकड़ करीब 4 क्विंटल उत्पादन हुआ है। वर्तमान नीमच मंडी में कलोंजी की कीमत 19 हजार से लेकर 28 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रही है।
दूसरे किसान हो रहे प्रेरित
उन्नत खेती में हो रही लाभ को देखते हुए अन्य किसान भी इसके लिए प्रेरित हो रहे हैं और इस वर्ष वह भी इन फसलों की बोवनी करेंगे। कई किसान फसलों को देखने खेतों पर भी पहुंचे थे और जानकारी ली।
किया जा रहा प्रोत्साहित
सरकार और कृषि विभाग भी किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलों का रकबा बढ़ाया जा सके। इन फसलों में खाद और कीटनाशक दवाओं का उपयोग भी कम होता है।
उपज बेचने जाना पड़ता है नीमच मंडी
औषधीय और मसाला फसलों की बोवनी करने वाले किसानों को उपज बेचने के लिए नीमच जाना पड़ता है। यदि स्थानीय स्तर पर खरीदी शुरू की जाए, तो इन फसलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ेगी। किसान इसकी मांग भी कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
Published on:
20 Apr 2026 12:46 pm
बड़ी खबरें
View Allसागर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
