
छतरपुर. बारिश के मौसम में ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी दावों की हकीकत खुद विभागीय आंकड़ों ने ही उजागर कर दी है। जिले में कुल 9 हजार 957 हैंडपंप स्थापित हैं, जिनमें से 300 हैंडपंप आज भी खराब पड़े हैं। पीएचई विभाग का दावा है कि पिछले सप्ताह 203 हैंडपंपों की मरम्मत की गई, लेकिन इसके बावजूद सैकड़ों हैंडपंप बंद पड़े हुए हैं। विभाग के नियमित रखरखाव के बजाय केवल अस्थायी सुधार करने के कारण जितने हैंडपंपों में सुधार हो रहा है, उससे अधिक खराब हो रहे हैं। हैंडपंपों के बंद होने से बारिश के सीजन में ग्रामीण कुएं समेत अन्य प्रदूषित जल स्रोतों का पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
तकनीकी खामियां बनीं बंद होने की बड़ी वजह
पीएचई विभाग के अनुसार बंद पड़े 300 हैंडपंपों में से
74 हैंडपंप- जिन्हें पूर्ण मरम्मत (मेजर रिपेयर) की सख्त जरूरत है।
68 हैंडपंप- जिनके पाइप फट चुके हैं।
56 हैंडपंप- जिनमें सामान्य सुधार होना शेष है।
53 हैंडपंप- जहां जल स्तर नीचे गिरने से पानी नहीं निकल रहा है।
28 हैंडपंप-जिनकी राइजिंग लाइन अंदर फंस गई है।
21 हैंडपंप-जिनकी पाइप लाइन टूटी हुई है।
विभागीय रिपोर्ट से स्पष्ट है कि यदि समय पर पाइप, वाशर और अन्य उपकरण बदले जाते, तो इतनी बड़ी संख्या में हैंडपंप बंद नहीं होते।
इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा हैंडपंप बंद
जिले में सबसे खराब स्थिति लवकुशनगर की है, जहां 68 हैंडपंप बंद पड़े हैं। इसके अलावा नौगांव में 43, बिजावर और बकस्वाहा में 62, राजनगर और गौरिहार में 37-37, छतरपुर में 33 तथा बड़ामलहरा में 20 हैंडपंप खराब स्थिति में हैं।
सरकारी संपत्ति की किसी को चिंता नहीं
मामले में पीएचई के कार्यपालन यंत्री प्रहलाद सिंह का कहना है कि हैंडपंपों की लगातार मरम्मत कराई जा रही है, लेकिन लोगों द्वारा सरकारी संपत्ति का सही रख-रखाव नहीं किया जाता, जिससे ये बार-बार खराब होते हैं। बंद पड़े हैंडपंपों को जल्द सुधारा जाएगा।