
datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)
छतरपुर. धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता के अनूठे केंद्र झनझन देवी धाम की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने जा रही है। शहर से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस रमणीक स्थल को वन विभाग द्वारा फॉरेस्ट सिटी की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। प्रथम चरण में करीब 1.5 करोड़ रुपए की लागत से बुनियादी ढांचे का कायाकल्प किया जा रहा है, जिससे आगामी नवरात्र पर्व पर यहंा पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं को सुगम और व्यवस्थित वातावरण मिल सकेगा।
झाडयि़ों और पथरीले रास्तों की जगह अब दिखेगा व्यवस्थित विकास
झनझन देवी मंदिर घने वन क्षेत्र और प्राकृतिक पहाडिय़ों के बीच स्थित है। अब तक यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पथरीले रास्तों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ता था। वन विभाग द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों के तहत अब यहाँ पैदल पथ (पाथवे) और बच्चों व परिवारों के लिए पार्क का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा, परिसर में स्थित ऐतिहासिक तालाब को भी संवारने का काम तेजी से जारी है। पूरे क्षेत्र में हाईमास्ट लाइटें लगाई जा रही हैं, जिससे रात के समय भी यह क्षेत्र दूधिया रोशनी से सराबोर रहेगा।
प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ किए बिना बढ़ेंगी आधुनिक सुविधाएं
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां के मूल नैसर्गिक और प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाए बिना विकास कार्य किए जा रहे हैं। वन क्षेत्र की हरियाली और पारिस्थितिकी को बरकरार रखते हुए आधुनिक जनसुविधाएं जुटाई जा रही हैं।
विकास कार्य पूरे होने के बाद झनझन देवी न केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में उभरेगा, बल्कि छतरपुर जिले के चुनिंदा इको-टूरिज्म स्पॉट में भी शामिल हो जाएगा, जहां दर्शनार्थियों को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ प्रकृति का सानिध्य भी मिलेगा।
नवरात्र में श्रद्धालुओं को मिलेगी भारी राहत
प्रतिवर्ष नवरात्र के दौरान झनझन देवी में देवी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है। संकरे व दुर्गम रास्तों के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब वन विभाग द्वारा सुव्यवस्थित रास्तों, बैठने के स्थानों और सुरक्षा इंतजामों के बनने से श्रद्धालुओं की राह न केवल आसान होगी, बल्कि भीड़ का दबाव भी आसानी से नियंत्रित किया जा सकेगा।
इनका कहना है
झनझन देवी मंदिर घने जंगल के बीच स्थित है। सुविधाओं का अभाव होने के बावजूद यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य को सहेजते हुए नई पहचान देने के लिए वन विभाग द्वारा पहले चरण में 1.5 करोड़ से बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है।
ऋषि शर्मा, डीएफओ , छतरपुर
Updated on:
27 Aug 2026 06:00 am
Published on:
27 Aug 2026 06:00 am
