
सागर. थानों में सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) पर हो रही ऑनलाइन कार्रवाई जल्द ही आइसीजेएस (इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) के माध्यम से सीधे कोर्ट से जुड़ जाएगी। इससे जहां एक ओर थाने में बैठे-बैठे ही चालान कोर्ट में पेश किए जा सकेंगे, दूसरी ओर दस्तावेजी कार्रवाई और आरोपी को लेकर कोर्ट आने- जाने की परेशानियों से भी निजात मिल जाएगी। इस सिस्टम के अमल में आने से पुलिसकर्मियों व कोर्ट के समय की भी बचत होगी। केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय द्वारा सॉफ्टवेयर संबंधी सहमति के बाद अब प्रदेश में गृह व विधि मंत्रालय के निर्देशन पर मर्जर की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया गया है। इसे अगले कुछ माह में अमलीजामा पहनते ही वॢकंग में आने की संभावना है। पुलिस थानों को स्वान नेटवर्क के माध्यम से सीसीटीएनएस से जोड़ा गया है। प्रदेश के सभी पुलिस थानों में इस सिस्टम पर ऑन लाइन एफआइआर और विवेचना संबंधी कार्रवाई होती है। जांच पूरी होने के बाद पुलिस अधिकारी चालान का परचा काटते हैं और इसका प्रिंट निकालकर उसे कोर्ट में पेश किया जाता है। वहां कमिट होने के बाद उस पर सुनवाई शुरू होती है। लेकिन चालान की प्रक्रिया इतनी पेंचीदगी भरी होती है कि उसे पूरा करने के बाद कोर्ट में पेश करने के दौरान भी काफी व्यवहारिक दिक्कतें सामने आती हैं। कई बार तो चालान पेश करने में आने-जाने से ही काफी समय व्यर्थ हो जाता है।
यह होगा फायदा
पुलिस अधिकारी थानों में चालानी प्रक्रिया को ऑनलाइन संपादित करने के बाद उसे सीधे ही ट्रांसफर कर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। ऑनलाइन चालान पेश होने से पुलिस थाने और कोर्ट के बीच की दौड़ खत्म हो जाएगी।
प्रदेश भर में जारी है
सीसीटीएनएस और आइसीजेएस के मर्जर को लेकर प्रक्रिया प्रदेशभर में जारी है। अगले चरण में फोरेंसिक लैबों को भी कोर्ट-थानों से मर्ज करने एकीकृत व्यवस्था तैयार करना प्रस्तावित है।
यह है इंटीग्रेटेड व्यवस्था का आधार
एक डेटा-एक प्रविष्टि के सिद्धांत पर प्रस्तावित इस एकीकृत व्यवस्था को लेकर केंद्र व राज्य स्तर पर अधिकारी उत्साहित हैं। इससे किसी विशेष मामले की जांच के दौरान फोरेंसिक प्रयोगशाला, कोर्ट व अन्य एजेंसियों को पुलिस के साथ जानकारी साझा करने में आसानी होगी। यह साक्ष्य संग्रह में दोहराव के प्रयासों को रोकने व पारदर्शिता लाने वाली व्यवस्था होगी। क्योंकि सभी एजेंसियों के पास एक समान डेटाबेस जिनमें जांच रिपोर्ट, बयान व रिकॉर्ड आदि शामिल है