भवनों में भी कर दी जाती है तोड़फोड़, सुबह स्कूल परिसर में फैली मिलती है गंदगी, विद्यार्थी और स्टाफ को होती है परेशानी, अधिकारी भेज रहे सिर्फ बाउंड्रीवॉल बनाने का प्रस्ताव
बीना. शासकीय स्कूलों में सुविधाओं के नाम पर लाखों रुपए हर वर्ष खर्च किए जाते हैं, लेकिन परिसर को सुरक्षित रखने के लिए बाउंड्रीवॉल तक नहीं बनाई गई हैं। खुला परिसर होने के कारण असामाजिक तत्व पनपते हैं और गंदगी फैलाते हैं।
स्कूलों में खेल मैदान नहीं हैं और जिन स्कूलों में छोटा मैदान है, तो वह भी खेलने लायक नहीं हैं। क्योंकि यहां बाउंड्रीवॉल नहीं बनाई गई हैं, जिससे स्कूल बंद होते ही असामाजिक तत्व पनपते हैं और कई जगहों पर खाली शराब की बोतले भी पड़ी रहती हैं। कुछ ऐसे स्कूल भी हैं, जो मुख्य सडक़ों पर हैं और खेलते समय यदि बच्चे सडक़ पर पहुंच जाएं, तो हादसा भी हो सकता है। ब्लॉक में प्राथमिक, माध्यमिक, हाइ और हायर सेकंडरी स्कूल की संख्या 191 है और अधिकांश में बाउंड्रीवॉल नहीं है।
कलरावनी स्कूल में सीधे सड़क पर पहुंचते हैं बच्चे
प्राथमिक स्कूल कलरावनी में स्कूल के सामने थोड़ी जगह खाली हैं और उसके बाद देहरी रोड निकला हुआ है। यदि बच्चे बाहर खेलते हैं, तो सड़क पर पहुंच जाते हैं, जहां हादसे की आशंका बनी रहती है। इसके बाद भी अभी तक यहां बाउंड्रीवॉल नहीं बनी है। शिक्षा विभाग के अधिकारी हर बार सिर्फ प्रस्ताव भेजने की बात कहते हैं।
बिहरना पीएम श्री स्कूल भी बाउंड्रीवॉल विहीन
बिहरना में पीएम श्री हाइ स्कूल में खाली जगह है, लेकिन बाउंड्रीवॉल न होने से परिसर असुरक्षित हैं और खेलने लायक नहीं हैं। यदि इस परिसर को सुरक्षित कर दिया जाए, तो बच्चों को खेल मैदान मिल जाएगा।
भानगढ़ हायर सेकंडरी स्कूल
भानगढ़ हायर सेकंडरी स्कूल का परिसर भी असुरक्षित हैं, जबकि यह एकीकृत स्कूल है और प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल एक ही परिसर में हैं। इसके बाद भी यहां बाउंड्रीवॉल नहीं बनाई गई है।
भवनों में होती तोड़फोड़, मवेशियों का रहता है डेरा
स्कूल परिसर खुले होने से भवनों में भी तोड़फोड़ की जाती है, जिसमें कहीं दरवाजे टूटे हैं, तो कहीं खिड़कियां। साथ ही मवेशियों, कुत्तों का भी जमावड़ा रहता है, जिससे विद्यार्थियों के घायल होने का खतरा बना रहता है। रिफाइनरी प्रबंधन ने आसपास के कुछ स्कूलों में बाउंड्रीवॉल बनाई है।