
दमोह जिले के पटेरा निवासी कमाता प्रसाद दहावत का लंबी बिमारी के चलते दमाेह जिला अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। निधन के बाद वह जाते-जाते दो लोगों की जिंदगी को रोशन कर गए। दरअसल उन्होंने जीवित रहते हुए नेत्रदान की इच्छा जाहिर की थी। निधन के बाद उनकी पत्नी गुड्डी बाई ने उनकी अंतिम इच्छा पूरी की। निधन के बाद बाद उनकी पत्नी गुड्डी बाई और भाई मनोज ने तुरंत बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की टीम से संपर्क किया और नेत्रदान कराने की बात कही। सूचना मिलते ही नेत्र रोग विभाग के डॉ. राकेश ने आई बैंक की डॉ. अंजली पटेल और डॉ. सारिका चौहान के साथ टीम को दमोह के लिए रवाना किया।
बीएमसी की आई बैंक टीम ने दमोह जिले के पटेरा पहुंचकर निधन के बाद नेत्रदान की प्रक्रिया कराई। टीम ने दमोह जिला अस्पताल पहुंचकर परिवार से नेत्रदान की लिखित सहमति ली, जिसके बाद नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। कॉर्निया सुरक्षित निकालकर सागर लाए गए, जहां नेत्र रोग विभाग के आई बैंक में उन्हें सुरक्षित रखा गया है। इस नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को जीवन में नई रोशनी मिलेगी। बीएमसी डीन डॉ. पीएस ठाकुर ने कहा कि नेत्रदान महादान है, मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है। बीएमसी में नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा भी उपलब्ध है।
Published on:
07 Apr 2026 05:01 pm
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