शनि अमावस्या 23 अगस्त शनिवार को शिव योग के संयोग में मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि की शुरुआत 22 अगस्त शुक्रवार को सुबह 11.55 बजे होगी, लेकिन उदया तिथि होने के कारण अमावस्या के कार्य 23 अगस्त को किए जाएंगे।
शनि अमावस्या 23 अगस्त शनिवार को शिव योग के संयोग में मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि की शुरुआत 22 अगस्त शुक्रवार को सुबह 11.55 बजे होगी, लेकिन उदया तिथि होने के कारण अमावस्या के कार्य 23 अगस्त को किए जाएंगे। अमावस्या पर शिव योग देर रात 12 बजकर 54 मिनट तक है। इससे पहले परिघ योग रहेगा। परिघ योग का समापन दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर होगा।
शनि अमावस्या के चलते कबूलापुल स्थित शनिदेव मंदिर, पहलवान बब्बा मंदिर में विराजमान शनिदेव मंदिर, चकराघाट स्थित शनिदेव मंदिर एवं परेड हनुमान मंदिर में विराजमान शनिदेव के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। अमावस्या पर कबूलापुल स्थित शनि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचेगे। तेल व तिल दान करने के लिए भक्तों के लिए भीड़ उमड़ेगी। वहीं भूतेश्वर मंदिर में अभिषेक, पूजन और हवन कार्यक्रम होगा। सुबह शनि भगवान का अभिषेक किया जाएगा। भगवान को प्रसन्न करने के लिए इमरती का भोग लगेगा।
पहलवान बब्बा मंदिर परिसर में स्थित शनि देव सिद्ध धाम मंदिर में इस बार भी शनि अमावस्या पर सुबह 5 बजे पंचांग पूजन के बाद सुबह 6 बजे से सार्वजनिक हवन होगा। पूर्णाहुति रात 11 बजे होगी। शाम 7 बजे महाआरती व भोग लगाया जाएगा। श्रद्धालुओं को हवन सामग्री निशुल्क दी जाएगी। मंदिर के पुजारी रूपेश शास्त्री हवन कराएंगे। सुबह से शनि महाराज का पंचामृत अभिषेक होगा।
पं. शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि शनि को सभी ग्रहों में न्याय के लिए माना जाता है। ये व्यक्ति के कर्मों का हिसाब किताब करते है यदि व्यक्ति अच्छे कर्म करता हैं तो शनि की दशा में उसे बहुत लाभ देते है यानी रंक से राजा भी बना देते हैं। जिनके कर्म खराब होते हैं, उन्हें शनि की साढ़े साती चलती है। शनि अमावस्या के दिन शनि साढ़े साती और ढैया से निजात पाने के लिए पवित्र नदी, तालाब में अथवा गंगाजल युक्त जल से स्नान करके शनि मंदिर पहुंचकर सरसों का तेल, काला वस्त्र, लोहा, जौ, काले तिल, सरसों आदि दान कर दीप दान आदि करना चाहिए। इस दिन गरीबों को भोजन कराने से पुण्य मिलेगा।