सागर

रेवती नक्षत्र और रवि ध्रुव योग में मनी शरद पूर्णिमा, भगवान का हुआ श्वेत वस्त्रों से श्रंृगार कर लगाया लड्डुओं का भोग

शरद पूर्णिमा का पर्व बुधवार को भक्ति-भाव से मनाया गया। महिलाओं ने शरद पूर्णिमा का व्रत रखकर ठाकुरजी को मावा के लड्डुओं का भोग लगाया। मंदिरों में भगवान का विशेष श्रंृगार हुआ। बड़ा बाजार स्थित देव राघव मंदिर में सुबह राघवजी सरकार का पंचामृत अभिषेक हुआ।

2 min read
Oct 17, 2024
mandir_ebedd0

बड़ा बाजार स्थित मंदिरों में हुए आयोजन

सागर. शरद पूर्णिमा का पर्व बुधवार को भक्ति-भाव से मनाया गया। महिलाओं ने शरद पूर्णिमा का व्रत रखकर ठाकुरजी को मावा के लड्डुओं का भोग लगाया। मंदिरों में भगवान का विशेष श्रंृगार हुआ। बड़ा बाजार स्थित देव राघव मंदिर में सुबह राघवजी सरकार का पंचामृत अभिषेक हुआ। श्वेत वस्त्र धारण कराकर चांदी के आभूषणों व फूलों से पूर्णिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। द्वारकाधीश मंदिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। सुबह मंगला आरती के बाद ठाकुरजी का अभिषेक पूजन हुआ। दोपहर में सत्यनारायण भगवान की कथा सुनाई गई। शाम को ठाकुरजी सफेद पोशाक धारण कर गर्भगृह से बाहर आए और भक्तों को दर्शन दिए। भगवान द्वारिकाधीश को केसर युक्त दूध का भोग लगाकर आरती के बाद भक्तों को वितरित किया गया। वहीं काकागंज स्थित हनुमान मंदिर में बुधवार को भगवान राम जानकी का सुबह नित्य पूजन होगा। दोपहर 12 बजे राजभोग आरती में मावा के लड्डू का भोग लगाया।

मल्ली माता मंदिर में हुए आयोजन

चकराघाट स्थित मल्ली माता मंदिर में बाज खेड़ावाल गुजराती समाज ने बुधवार को शरद पूर्णिमा मिलन उत्सव का आयोजन किया। इस अवसर पर महिलाओं और बच्चों के विभिन्न प्रतियोगिताएं हुई। बच्चों की चित्रकला, दीपक सजाओ और महिलाओं के लिए मटकी सजाओ और फूल बाती के गहने बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया।

चांद की रोशनी में रखी खीर

मंदिरों में पूजा-अर्चना के बाद चांद की रोशनी में घरों की छत पर खीर रखी गई। पं. मनोज तिवारी ने बताया कि चंद्रमा की रोशनी धरती पर अमृत की तरह बरसती है। उन्होंने बताया कि चांद की रोशनी को औषधि रूप देने के लिए पूर्णिमा के दिन घरों की छतों पर खीर बनाकर रखते हैं। जब चांद की किरणें खीर पर पड़ती हैं तो वह अमृतमयी औषधि के रूप में काम करती है। इस रात चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होने के कारण साल में सबसे ज्यादा प्रकाशमान रहता है। चांद की रोशनी में रखी खीर का दूसरे दिन सेवन करने से बीमारियों से दूर रहते हैं।

भगवान को लड्डुओं का लगाया भोग

पं. केशव महाराज शरद पूर्णिमा के अवसर पर भगवान को लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाता है। पं. शास्त्री के अनुसार भगवान का पूजन कर उन्हें डेढ पाव मावा, डेढ़ पाव शक्कर के 6 लड्डू बनाए जाते हैं, जिन्हें सखी, बच्चे, तुलसी आदि को अर्पित किए जाते हैं। इस दिन गायों का पूजन भी किया जाता है। पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या रास पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन लक्ष्मीजी का समुद्र मंथन से जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को महालक्ष्मी जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लक्ष्मीनारायण की पूजा भी की जाती है।

Published on:
17 Oct 2024 11:44 am
Also Read
View All

अगली खबर