सागर

वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने रखी थी मंदिर की नीव, बीएमसी प्रथम बैच के छात्रों ने संवारा

हर शिवरात्रि होता है शहर का सबसे बड़ा भंडारा, करीब 25 हजार श्रद्धालु पाते हैं प्रसाद
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Mar 04, 2024
वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने रखी थी मंदिर की नीव, बीएमसी प्रथम बैच के छात्रों ने संवारा
वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने रखी थी मंदिर की नीव, बीएमसी प्रथम बैच के छात्रों ने संवारा

सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज परिसर के मृत्युंजय महादेव मंदिर में हर साल शिवरात्रि पर शहर का सबसे बड़ा भंडारा आयोजित होता है। यहां करीब 25 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। बीएमसी परिसर के अलावा आसपास के मोहल्लों में भी कई घरों में गैस चूल्हे नहीं जलते। महादेव मंदिर की नींव मेडिकल कॉलेज बनने के पहले यहां वृद्धाश्रम में निवासरत 40-45 बुजुर्गों ने रखी थी जो 4 बाय 4 की मढ़िया में महादेव की पूजा अर्चना करते थे। आज भी भंडारे का मुख्य आयोजक उन बुजुर्गों को ही बनाया जाता है।

2011 में मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जब वृद्धाश्रम शिफ्ट हुआ तो बुजुर्ग मेडिकल कॉलेज के पहले बैच के छात्रों को मंदिर की जिम्मेदारी देकर चले गए थे। प्रथम बैच के छात्रों ने मंदिर को बचाने का न सिर्फ संघर्ष किया बल्कि छात्र जीवन में मिलने वाली पॉकेट मनी और स्थानीय सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। 2011 से हर साल बीएमसी में शहर का सबसे बड़ा भंडारा होता है। मरीज, मरीज के परिजन, आसपास मोहल्ले के लोग, बीएमसी परिवार के लोग भंडारे में तन-मन-धन से शामिल होते हैं।

2014 में हुआ था मंदिर का कायाकल्प-

मृत्युंजय महादेव समिति के अध्यक्ष डॉ. उमेश पटेल ने बताया कि परिसर से वृद्धाश्रम शिफ्ट होने के बाद 2011 में महाशिवरात्रि पर उन्होंने पहला भंडारा आयोजित किया था। लेकिन 2012 में जब आयोजन किया तो बारिश ने खलल डाल दिया। प्रथम बैच के छात्रों ने अपनी पॉकेट मनी और विधायक, सांसद से सहयोग लेकर मंदिर का कायाकल्प कराया। निर्माण फिर भी अधूरा रहा तो बीएमसी के हर डॉक्टर, स्टाफ ने मंदिर के लिए दान दिया, यहां तक की बीएमसी में भर्ती मरीजों ने भी जो भी बना दान दिया और संघर्ष के बाद 2014 में मृत्युंजय मंदिर का कायाकल्प हुआ। 2015 में मंदिर में महादेव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम हुआ था जिसमें पंडित देव प्रभाकर शास्त्री (दद्दाजी) शामिल हुए थे।

एक माह पहले से होने लगती है तैयारी-

2011 से हर साल यहां 22-25 हजार श्रद्धालुओं के लिए भंडारा आयोजित होता है। सोनू चुटीले, रिषभ दुबे सहित करीब सौ सदस्य एक माह पहले ही आयोजन की व्यवस्थाओं में लग जाते हैं। जिसमें करीब 22 क्विंटल आटा, 60 टीन तेल, 2 हजार लीटर दूध, 3 क्विंटल शक्कर, 3 क्विंटल चावल, 50 किग्रा ड्राइफ्रूट सहित अन्य सामग्री प्रत्येक भंडारे में लगती है। भंडारे में मरीज व परिजन पूरे दिन व रात का खाना भी यहीं करते हैं। पूरी-सब्जी और खीर के लिए यहां लाइनें लगी रहतीं हैं।

महादेव ने सुनी थी प्रशिक्षु डॉक्टर्स की फरियाद-

समिति अध्यक्ष डॉ. उमेश पटेल की माने तो 2015 में जब प्रथम बैच के छात्रों की एमबीबीएस पूरी हुई तो एनएमसी ने स्टाफ व संसाधनों के अभाव में बीएमसी की मान्यता शून्य कर दी थी। इससे पूरे एक साल तक सभी प्रथम बैच के डॉक्टर्स भटकते रहे और 2016 के लिए नए प्रवेश भी नहीं हुए थे। ऐसे में सभी ने महादेव भगवान से प्रार्थना की और महादेव की सेवा में लग गए थे। कुछ समय बाद भगवान भोलेनाथ ने सब सही कर दिया। आज भी प्रथम बैच के डॉक्टर शिवरात्रि पर भंडारे में शामिल होते हैं।

मंदिर की नींव रखने वाले बुजुर्गों का होता है सम्मान-

मेडिकल कॉलेज बनने के बाद 2009 में तत्कालीन कलेक्टर-कमिश्नर ने बीएमसी परिसर में मौजूद 4 बाय 4 के इस महादेव मंदिर को परिसर से हटाने का निर्णय ले लिया था। लेकिन एमबीबीएस छात्रों व बीएमसी परिवार ने मरीजों, उनके परिजनों और स्टाफ के लिए मंदिर को टूटने से बचाया था और बाद में उसका कायाकल्प किया। मंदिर की नींव रखने वाले शिफ्ट हुए बुजुर्गों का हर साल समिति के लोग खुरई रोड स्थित वृद्धाश्रम से लाते हैं और उनका सम्मान करते हैं। बुजुर्ग ही भोग लगाते हैं।

Published on:
04 Mar 2024 11:11 pm