Uldan Dam Project Banda Major Irrigation Project: सागर जिले की बंडा तहसील में वृहद सिंचाई परियोजना के तहत बनाया जा रहा है उल्दन बांध, श्रद्धालु परेशान समय रहते कदम नहीं उठाया तो जलमग्न हो जाएंगे ऐतिहासिक मकरसंक्रांति पर्व की पहचान बना महादेव घाट, मां हरसिद्धि मंदिर समेत देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और सैकड़ों मंदिर।

Uldan Dam Project: बंडा वृहद सिंचाई परियोजना के तहत उल्दन बांध के डूब क्षेत्र में धसान नदी पर स्थित एतिहासिक महादेव घाट और कई प्राचीन मंदिर आ रहे हैं। इन मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं अभी भी स्थापित हैं, जिन्हें धार्मिक मान्यता के अनुसार दूसरी जगह स्थापित करने के लिए प्रशासन ने अब तक कोई भी प्रयास नहीं किए हैं। प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाया तो देवीदेवताओं की प्रतिमाओं की जल समाधि तय है।
सागर जिले में स्थित महादेव घाट उल्दन पर बाढ़ेर और धसान नदी का संगम है, यहां चार अलग-अलग मंदिर हैं, जिसमें भगवान शंकर, मां पार्वती, हनुमानजी, भगवान गणेश जी के मंदिर शामिल हैं। यहां मकर संक्रांति पर पारंपरिक मेला लगता है और विवाह आदि होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने बंडा मार्ग पर नए स्थान पर केवल जगह चिन्हित की है, लेकिन पुराने स्थान पर अभी जस की तस स्थिति है। बहरोल ग्राम के आसपास दतया बब्बा, खेर माता, हरसिद्धि माता, राज मंदिर बहरोल, शंकर जी मंदिर थाने के पास आदि स्थान भी डूब क्षेत्र में है, जिनके विस्थापन के लिए प्रशासन ने अब तक कोई भी कदम नहीं उठाया है।
सलैया खुर्द, उल्दन, बहरोल के साथ अब प्रशासन ने विस्थापन की कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पिपरिया इल्लई गांव में भी संरचनाओं को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस बल की उपस्थिति में उक्त गांव में शांतिपूर्ण तरीके से कार्रवाई की गई। इस दौरान गांव से कुछ लोग अपना सामान लेकर दूसरी जगह विस्थापित भी हुए।
बहरोल में मां हरिसिद्ध माता का मंदिर है। यह डूब क्षेत्र में आ रहा है। देवी मां की प्रतिमा अब भी मंदिर में विराजमान है। प्रशासन ने इसको लेकर कोई प्रयास नहीं किए।
- पं. अमित तिवारी, महाराज
प्रशासन ने बोला तो है कि एक स्थान पर उन्होंने मंदिर के लिए जमीन चिन्हित की है, लेकिन अभी कोई काम नहीं हुआ है। प्रतिमाएं मंदिर में ही हैं।
- सुरेंद्र, उल्दन गांव निवासी
महादेव घाट के मंदिर इसी साल डूब में आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि नई जगह पर जहां मंदिर बनना है, वहां पत्थर आदि डाले गए हैं, लेकिन और कोई काम नहीं हुआ।
- धर्मेंद्र, उल्दन गांव निवासी
देवी-देवताओं की मूर्तियों को उनके वर्तमान स्थान से हटाकर किसी दूसरे स्थान पर स्थापित करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है और मंदिर जलमग्न हो जाते हैं, तो धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से उचित नहीं है। भगवान की मूर्तियों को सम्मानपूर्वक उठाकर अन्यत्र स्थापित किया जाना चाहिए, जबकि मंदिरों को उनके मूल स्वरूप में बने रहने देना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार मूर्तियों को न हटाने की स्थिति विनाशकारी मानी जाती है, यह शास्त्र संगत नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों से आग्रह है कि वे इस विषय पर गंभीरता से विचार करें।
- पं. रामगोविंद शास्त्री, वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य