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पचास बिस्तरीय सिविल अस्पताल में डॉक्टरों का टोटा, चार एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे चल रही ओपीडी

पांच विशेषज्ञ पदों में सिर्फ स्त्री रोग विशेषज्ञ पदस्थ, डॉक्टरों की कमी से मरीजों को नहीं मिल रहा समय पर इलाज, हो रहे विवाद, वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे ध्यान
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Acute shortage of doctors at the 50-bed Civil Hospital; OPD running with just four MBBS doctors.

सिविल अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज। फोटो-पत्रिका

बीना. शहर के 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर तो दूर, स्वीकृत एमबीबीएस डॉक्टरों के पद भी पूरे नहीं भर पाए हैं। वर्तमान में अस्पताल की ओपीडी केवल चार एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रही है। इसके बाद भी वरिष्ठ अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सिविल अस्पताल में पांच एमबीबीएस डॉक्टर और पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें चार एमबीबीएस डॉक्टर हैं और सिर्फ स्त्री रोग विशेषज्ञ ही पदस्थ हैं। शिशु रोग, सर्जन, मेडिसिन और नेत्र रोग विशेषज्ञ के पद लंबे समय से खाली हैं। विशेषज्ञ सेवाएं नहीं मिलने के कारण गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे उनपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। वर्तमान में अस्पताल में ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 400 तक पहुंच रही है, जिससे डॉक्टरों पर भार बढ़ गया है। वहीं, कई बार डॉक्टर न मिलने पर विवाद की स्थिति भी बन जाती है। एमबीबीएस डॉक्टर की कमी के चलते सीएचओ की मदद ओपीडी में ली जा रही है। इसके अलावा शहर के नई बस्ती में संचालित अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यू-पीएचसी) में भी एक एमबीबीएस डॉक्टर पदस्थ हैं।

डॉक्टर नहीं, इसलिए शुरू नहीं हो पा रही संजीवनी क्लीनिक
सरकार की संजीवनी क्लीनिक योजना भी डॉक्टरों की कमी के कारण शुरू नहीं हो पा रही है। उरैया में क्लीनिक का भवन तैयार हो गया है और इसके संचालन के लिए एक डॉक्टर सहित आवश्यक स्टाफ की जरूरत है, लेकिन नियुक्तियां नहीं होने से इसकी शुरुआत नहीं हो पा रही है।

कंजिया, बरौदिया में बन रहे पीएससी भवन
क्षेत्र के कंजिया और बरौदिया में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन भी अगले कुछ महीनों में बनकर तैयार हो जाएंगे। यदि समय पर डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति नहीं हुई, तो इन भवनों में भी ताला लटकने की आशंका बनी रहेगी।

भेजे जाते हैं मांग पत्र
डॉक्टरों की कमी के संबंध में लगातार वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजे जाते हैं, लेकिन नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। संजीवन क्लीनिक भी शुरू नहीं हो पा रही है।
डॉ. संजीव अग्रवाल, बीएमओ, बीना