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बारिश से चौपट हुई थी खरीफ की फसल, सर्वे में नुकसान की पुष्टि के बावजूद किसानों को नहीं मिली बीमा राशि

हर साल एक करोड़ रुपए से ज्यादा प्रीमियम दे रहे हैं किसान, राशि न मिलने पर बढ़ रहा आक्रोश, बीमा राशि न आने पर किसान करेंगे प्रदर्शन, जल्द बीमा राशि दिलाने की मांग
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Kharif crops were ruined by rain; despite the survey confirming the losses, farmers did not receive the insurance payout.

पिछले वर्ष इस तरह खराब हुई थी सोयाबीन की फसल। फोटो-पत्रिका

बीना. फसल बीमा योजना के तहत हर साल क्षेत्र के किसान एक करोड़ रुपए से अधिक का प्रीमियम जमा कर रहे हैं, लेकिन नुकसान होने के बाद भी उन्हें बीमा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पिछले वर्ष खरीफ सीजन में लगातार हुई बारिश के कारण सोयाबीन की फसल बर्बाद होने के बाद भी क्षेत्र के किसानों को एक रुपए बीमा राशि भी नहीं आई है।
पिछले वर्ष खरीफ सीजन में बारिश ज्यादा और नदी किनारे स्थित खेतों में बाढ़ आने से फसलें बर्बाद हो गई थीं। सबसे ज्यादा बोवनी सोयाबीन की हुई थी और बारिश के कारण इसका उत्पादन 1 से 2 क्विंटल एकड़ निकला था। आर्थिक नुकसान झेलने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन अन्य जिलों और तहसीलों में बीमा राशि आने के बाद भी क्षेत्र के किसानों को कुछ नहीं मिला, जिससे उनका आक्रोश बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि हर वर्ष समय पर फसल बीमा के लिए प्रीमियम काट लिया जाता है, लेकिन जब नुकसान की भरपाई की बारी आती है, तो उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है। उनका आरोप है कि सर्वे में नुकसान की पुष्टि होने के बाद भी बीमा राशि नहीं मिली है। किसानों ने शीघ्र बीमा राशि जारी करने की मांग की है। बीना के साथ-साथ मालथौन, खुरई, राहतगढ़ तहसील के किसान भी बीमा राशि का इंतजार कर रहे हैं। इस वर्ष भी खरीफ फसल के लिए फसल बीमा के लिए प्रीमियम काटा जाने लगा है। कई किसानों ने प्रीमियम जमा करना भी बंद कर दिया है।

सर्वे के अनुसार भेजी गई थी रिपोर्ट
राजस्व, कृषि विभाग द्वारा जो सर्वे कराया गया था, उसके अनुसार नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। बीमा क्लेम क्यों नहीं मिला है इसकी जानकारी नहीं है। बीना सहित मालथौन, खुरई, राहतगढ़ तहसील में भी बीमा राशि नहीं आई है।
सौरभ जैन, डीआर, एआईसी बीमा कंपनी

किया जा रहा है कैलकुलेशन
बीमा राशि न आने पर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा हुई है। वर्तमान में फसल बीमा राशि का कैलकुलेशन किया जा रहा है और जल्द ही बीमा राशि किसानों के खातों में आ जाएगी।
राजेश त्रिपाठी, उप संचालक कृषि, सागर