विधायक के दलबदल मामले में हुई 31 मार्च को सुनवाई का, याचिकाकर्ता ने की प्रेसवार्ता, 20 अप्रेल को होनी है अगली सुनवाई, विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से रखा जाना पक्ष
बीना. विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में 31 मार्च को सुनवाई थी और न्यायालय में हुई कार्यवाही को लेकर लोगों को भ्रमित करने का आरोप याचिकाकर्ता कांग्रेस नेता प्रदीप राय ने प्रेसवार्ता कर लगाया है।
उन्होंने बताया कि दलबदल मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार और उनके माध्यम जबलपुर हाइकोर्ट में याचिका लगाई गई है। 31 मार्च को हाइकोर्ट में सुनवाई थी। इस दौरान कार्यवाही के विपरीत कुछ अखबारों, चैनल में खबरें चलाई गईं कि कोर्ट ने मीडिया के ऑडियो, वीडियो सहित अन्य तत्थों को मान्य न करते हुए नकार दिया है। साथ ही निर्मला सप्रे के अधिवक्ता ने कहा है कि विधायक ने कांग्रेस नहीं छोड़ी है। जबकि सुनवाई के दिन इस तरह का कोई उल्लेख नहीं हुआ है। क्योंकि अभी तथ्यों को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि कार्यवाही में राज्य सरकार महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा है कि 9 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिकाकर्ता उमंग सिंगार से दलबदल के प्रमाण लिए जाएंगे और फिर विधायक को बुलाकर उनका पक्ष जाना जाएगा कि वह किस पार्टी में हैं। क्योंकि अभी याचिकाकर्ता और विधायक अध्यक्ष के समक्ष बात रख सकते हैं। 20 अप्रेल को कोर्ट में अगली सुनवाई है और विधानसभा अध्यक्ष अपना पक्ष नहीं रखते हैं, तो बड़ा निर्णय हो सकता है। गौरतलब है कि विधायक निर्मला सप्रे ने 2 मई 2024 को राहतगढ़ में सभा के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष कांग्रेस छोडकऱ भाजपा ज्वाइन की थी, लेकिन अभी तक भाजपा की सदस्यता नहीं ली है।
उपचुनाव हुआ तो 25 हजार वोटों से होगी हार
कांग्रेस नेता ने बताया कि अभी यह स्थिति है कि विधायक समझ नहीं पा रही हैं कि वह किस दल में हैं। चार विधानसभा सत्र हो चुके हैं, लेकिन वह अंदर नहीं बैठ पाईं हैं, सिर्फ बाहर हस्ताक्षर करती हैं। न कांग्रेस ने स्थान दिया है और न भाजपा ने। अब भाजपा ने भी उन्हें नकार दिया है। साथ ही विधायक को डर है कि यदि उपचुनाव हुआ तो 25 हजार वोट से हारेंगी और इससे बचने के लिए इस तरह के भ्रम फैलाए जा रहे हैं।