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मंडी में अवैध तरीके से बनाईं तीस गोदाम, कुछ ने दूसरे व्यापारियों को दीं किराए पर, प्रबंधन को नहीं मिल रहा एक रुपया

मंडी प्रबंधन नहीं कर रहा कार्रवाई, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिए जाते हैं नोटिस, हो रहा राजस्व का नुकसान, सिर्फ एक गोदाम को हटाने की कार्रवाई हुई

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Thirty warehouses have been illegally constructed in the market, some rented out to other traders, and the market is not receiving a single rupee.

मंडी में बनाई गईं अवैध तरीके से गोदाम। फोटो-पत्रिका

बीना. कृषि उपज मंडी परिसर में व्यापारियों ने करीब तीस दुकानें अवैध कब्जा कर बनाई हैं और यहां व्यापार कर रहे हैं। इन दुकानों में कुछ व्यापारियों ने दुकान अन्य लोगों को हजारों रुपए महीने के किराए पर दे दी हैं, लेकिन मंडी प्रबंधन को एक रुपया नहीं मिल रहा है। इसके बाद भी इन गोदामों को हटाने की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
मंडी से मिली जानकारी के अनुसार करीब बीस वर्ष पूर्व समिति ने व्यापारियों को अस्थायी रूप से प्लांट आवंटित किए थे और फिर मंडी बोर्ड ने आंवटन निरस्त कर दिया था। इसके बाद भी तीस व्यापारियों ने अवैध कब्जा कर यहां गोदाम, शेड बनाए हैं और यहां उपज की खरीद, बिक्री कर व्यापार कर रहे हैं। करीब आठ व्यापारियों ने दुकान किराए पर दी हैं और 10000 से 25000 रुपए महीना किराया लिया जा रहा है, लेकिन इन तीस दुकानों से मंडी को कोई लाभ नहीं है। प्रबंधन ने कई बार अवैध कब्जा हटाने के नोटिस जारी किए हैं और फिर इसके आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई। यदि शुरू से ही मंडी प्रबंधन को किराया मिलता, तो लाखों रुपए की आय होती।

मनमर्जी से कर लेते हैं निर्माण
कुछ वर्ष पहले भी व्यापारियों ने नए गोदाम और शेड का निर्माण किया है, लेकिन अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की है। सिर्फ चार दिन पूर्व बनाई गई एक गोदाम को हटाने की कार्रवाई की गई है। एक दुकान टूटने के बाद अब यह मांग उठ रही है कि सभी अवैध गोदामों पर कार्रवाई की जाए। जबकि चार वर्ष पूर्व भी एक व्यापारी ने गोदाम और शेड बनाया था, लेकिन उसपर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

व्यापारियों का कहना है, दी जाए जगह
मंडी व्यापारियों का कहना है कि कई वर्षों बाद भी उन्हें गोदाम, शेड बनाने के लिए जगह का आवंटन नहीं किया गया है। यदि उन्हें जब दे दी जाए तो वह नियमानुसार गोदामों का निर्माण करेंगे। साथ ही मंडी को भी आय होने लगेगी।

करेंगे कार्रवाई
अवैध निर्माण कर जिन व्यापारियों ने किराए पर गोदामें दी हैं, उनकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गोदामों के आवंटन के लिए भी प्रक्रिया की जाएगी, जिससे मंडी को राजस्व मिल सके।
कमलेश सोनकर, सचिव, कृषि उपज मंडी, बीना