सर्दी का मौसम जिस तरह से हार्ट के मरीजों के लिए घातक होता है उसी तरह से कोहरा भी सांस के रोगियों की परेशानी बढ़ा देता है। एक्सपर्ट के अनुसार सर्दियों में सुबह का समय दिल के मरीजों और शाम का समय सांस के लिए मरीजों के लिए संवेदनशील होता है।
अगर आप दिल के मरीज हैं या फिर सांस लेने में परेशानी होती है तो सावधान रहिएगा। सर्दी का मौसम दोनों ही तरह के लोगों के लिए संवेदनशील होता है। डॉक्टर संजीव मिगलानी के अनुसार सर्दियों में सबसे अधिक हार्ट अटैक होते है। सुबह पांच बजे से आठ बजे तक का समय दिल के मरीजों के लिए और शाम पांच बजे से रात आठ बजे तक का समय सांस के मरीजों के लिए संवेदनशील होता है।
सुबह टहलने से बचें दिल के मरीज
सुबह के समय टहलना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है लेकिन दिल के मरीजों के लिए सुबह के समय टहलना जानलेवा भी साबित हो सकता है। डॉक्टर संजीव मिगलानी बताते हैं कि सुबह के समय शरीर में कैटाकोलामीन नाम के तरल पदार्थ का रिसाव बढ़ जाता है। ऐसे में हार्ट अटैक की आशंका भी बढ़ जाती है। इसलिए दिल के मरीजों को सुबह की ठंड से बचना चाहिए। सुबह के समय टहलना दिल के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है।
शाम की ठंड से बचें सांस के मरीज
डॉक्टर संजीव मिगलानी के ही अनुसार शाम के समय होने वाली ठंड सांस के मरीजों के लिए खतरनाक है। हवा में ठंड और नमी के कारण डस्ट बढ़ जाती है और जो सांस की नली में परेशानी बना देती है। ऐसे में शाम की ठंड से सांस के रोगियों के बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि खुले में सांस लेने से भी बचना चाहिए। सांस के रोगियों को मुंह पर कपड़ा लगाकर रखना चाहिए।
ओपीडी और एमरजेंसी में बढ़े सांस के मरीज
सर्दी बढ़ते ही सरकारी अस्पताल की ओपीडी और एमरजेंसी वार्ड में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर ओपी वर्मा के अनुसार ऐसा हर वर्ष होता है। सर्दी शुरू होते ही सांस और दिल के मरीजों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ओपीडी से लेकर एमरजेंसी में इन मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ता है। सुबह के समय और रात के समय दिल और सांस के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।