सहारनपुर के चिलकाना क्षेत्र में ईंट-भट्ठे पर खेल रहे 5 बच्चे मिट्टी की ऊंची ढांग गिरने से उसके नीचे दब गए। इस हादसे में 2 मासूमों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि 3 बच्चों की हालत गंभीर है। चीख-पुकार के बीच जब तक बच्चों को बाहर निकाला जाता तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
संगमौर गांव के नजदीक स्थित ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने वाले परिवारों के बच्चे मंगलवार दोपहर को खेल रहे थे। भट्ठे पर काम के लिए मिट्टी उठाए जाने के कारण वहां गहरी खाई बन गई थी। पांचों बच्चे उसी खाई के पास खेल रहे थे। तभी अचानक ऊपर से मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया।
मिट्टी गिरते ही मौके पर मौजूद मजदूरों और परिजनों में हड़कंप मच गया। अपनों को बचाने की जद्दोजहद में मजदूरों ने बिना किसी मशीन का इंतजार किए हाथों से मिट्टी हटाना शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद जब बच्चों को बाहर निकाला गया तो नजारा बेहद दर्दनाक था। 8 साल के जावेद और 11 साल की अमिया के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। दोनों मासूमों की मौके पर ही मौत हो गई थी। बाकी 3 को गंभीर हालत में सहारनपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हादसे का शिकार हुए बच्चे उन मजदूर परिवारों के थे जो पिछले करीब 10 साल से इसी भट्ठे पर काम कर रहे हैं। ये मजदूर मूल रूप से शामली जिले के कांधला कस्बे के रहने वाले हैं और रोजी-रोटी की तलाश में यहां बसे हुए थे। हर साल बरसात के दिनों में ये अपने गांव लौट जाते थे लेकिन इस बार मानसून आने से पहले ही इनके घरों के चिराग बुझ गए। शाम को गमगीन माहौल में दोनों मृत बच्चों को संगमौर गांव के ही कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
हादसे की सूचना पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा, लेकिन रिजनों ने किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई करने या पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। पुलिस ने बताया कि मजदूर परिवारों ने आपसी सहमति के बाद शवों का अंतिम संस्कार किया है। फिलहाल, अस्पताल में भर्ती तीन बच्चों की स्थिति पर डॉक्टरों की टीम नजर बनाए हुए है।