मंडला की महिला कलेक्टर सूफिया फारूकी द्वारा पूजन किए जाने को इस्लाम के खिलाफ मानते हैं देवबंद के उलेमा
देवबंद। इस साल जनवरी की शुरुआत में मध्य प्रदेश के मंडला की महिला कलेक्टर सूफिया फारूकी ने साड़ी पहनकर आदि शंकराचार्य के धातु संग्रहण यात्रा का स्वागत किया था। इतना ही नहीं उन्होंने उनकी खड़ाऊं सिर पर रखकर यात्रा में अपनी उपसस्थिति भी दर्ज कराई थी। इसके बाद उन्होंने पूजा अर्चना भी की। इसको जहां एक ओर देश के हिंदू लोगों ने गंगा-जमुनी तहजीब का एक हिस्सा बताया, वहीं देवबंद के उलेमा इसे इस्लाम के खिलाफ मानते हैं। उन्होंने सूफिया फारूकी को तौबा करने की सलाह दी है ताकि उनका इस्लाम बाकी रहे।
उलेमा ने कहा- दूसरे मजहब की रस्म को अपनाना नाजायज
मदरसा जामिया हुसैनिया के मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है, इस्लामी नुख्ता नजर के ऐतबार से यह बहुत गलत बात है। किसी दूसरे मजहब के पूजा-पाठ में हिस्सा लेना, पूजा के एेतबार से उसमें हिस्सा लेना इस्लामी नुख्ता नजर के खिलाफ है। जो शख्स ऐसी हरकत करता है, चाहे वह डीएम हो या आम आदमी हो, हर एक के लिए मजहब का कानून एक होता है। उसको चाहिए कि वह फौरन इससे तौबा करे और अल्लाह के हुजूर में माफी मांगे। कोई भी रस्म गैर मजहब की हो, उसको किसी भी मुसलमान को अपनाना बिल्कुल गलत और नाजायज है।
शंकराचार्य की चरण पादुकाओं का किया था पूजन
दरअसल, मध्यप्रदेश में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के लिए धातु संग्रहण और जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। एकात्म यात्रा के माध्यम से लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है। 2 जनवरी को जब यात्रा डिंडौरी जिले से मंडला जिले के चाबी गांव में पहुंची, तो यहां यात्रा का स्वागत करते हुए कलेक्टर सूफिया फारूकी ने शंकराचार्य की चरण पादुकाओं का पूजन किया और उनको सिर पर रखकर यात्रा में चलीं। वहीं, महिला कलेक्टर सूफिया फारूकी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही हैं।