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दारुल उलूम के फतवे पर मुस्लिम महिलाओं का विरोध, कहा- नजरिया बदलने की जरूरत

मुस्लिम महिलाओं ने देवबंद के नये फतवे का विरोध किया है।

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muslim women against deoband fatwa

शामली। सहारनपुर के देवबंद में दारुल उलूम के द्वारा जारी किए गए फतवे का विरोध शुरू हो गया है। दरअसल, दारुल उलूम ने हाल ही में टाइट बुर्का पहनने और बैंककर्मियों के घर में शादी नहीं करने को लेकर फतवा जारी किया था। जिसका शामली में रहनेवाली मुस्लिम महिलाओं ने विरोध किया है। महिलाओं का कहना है कि लोगों का नजरिया अच्छा होना चाहिए। कपड़ा ढीला हो या टाइट उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।


बुर्का मुस्लिम समाज की रीत है

मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि शर्म आंखों की होती है, जिसको मुस्लिम समाज की महिलाएं खूब करती हैं। वहीं, इस मामले को लेकर कुछ महिलाओं का तो साफ तौर से कहना है कि तन ढकने के लिए घर की चादर भी काफी है। रही बात बुरखे की तो बुर्का मुस्लिम समाज का एक रीत है, जिसके कारण उसे महिलाएं पहनती हैं।

बैंक की नौकरी वाले फतवे पर जताई नाराजगी

कुछ मुस्लिम महिलाओं का साफ तौर से कहना है कि बैंक में काम करनेवालों के बारे में जो फतवा जारी किया गया है, वह सरासर गलत है। महिलाओं का कहना है कि लड़का हो या लड़की पढ़-लिख कर कहीं ना कहीं तो जॉब करेगा। जब पढ़-लिखकर कामयाब होगा तो कहीं ना कहीं तो जॉब करनी ही होगी। महिलाओं का कहना है कि बैंक की नौकरी हो, वकील की, डॉक्टर की या फिर इंजीनियर की, कहीं ना कहीं तो जॉब करनी ही होगी। हिंदुस्तान में पढ़ाई तरक्की के लिए की जाती है, वह चाहे किसी भी धर्म का हो। महिलाओं का कहना है कि पढ़-लिखकर कोई भी तरक्की करेगा, तो कहीं ना कहीं तो जॉब वो करेगा ही। इससे वह किसी मजहब की तरक्की ना होकर, देश की तरक्की होगी।

मौलवियों ने किया फतवे का समर्थन

वहीं, दारुल उलूम के द्वारा जारी किए गए दो फतवे को मुस्लिम समाज के शामली मौलवियों ने समर्थन दिया है। उनका कहना है कि दारुल उलूम में बहुत ही शिक्षित और समझदार व्यक्तियो की जमात है, जो वो फतवा जारी करते हैं हम उनका सम्मान करते हैं।