
SP Congress Alliance UP: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान एक बार फिर सामने आ गई। सहारनपुर में मंगलवार को हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (DISHA) की बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक के बीच तीखी बहस हो गई। दोनों नेताओं के बीच हुई नोकझोंक का वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान आशु मलिक क्षेत्र की जनता से जुड़े कुछ सवाल उठाना चाहते थे। इसी दौरान इमरान मसूद ने बैठक की प्रक्रिया और नियमों का हवाला देते हुए उनसे अनुमति लेकर बोलने को कहा। इस पर दोनों नेताओं के बीच बहस बढ़ गई। मसूद ने आपत्ति जताते हुए कहा कि बैठक में सभी लोगों को बोलने का मौका मिलना चाहिए। वहीं आशु मलिक का कहना था कि वह जनता से जुड़े सवाल ही सामने रख रहे हैं और उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है। मामला बढ़ने पर इमरान मसूद ने कहा कि बैठक नियमों के मुताबिक चलेगी और चेयर की अनुमति के बिना सवाल नहीं पूछे जा सकते। जवाब में मलिक ने कहा कि यह कोई आधिकारिक रैली नहीं है, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक है।
दोनों नेताओं के बीच यह बहस बैठक में मौजूद अधिकारियों और अन्य जनप्रतिनिधियों के सामने हुई। कुछ देर तक माहौल गर्म रहने के बाद मामला शांत हुआ और बैठक की कार्यवाही आगे जारी रही। बताया गया कि दिशा की यह बैठक करीब चार घंटे तक चली। प्रशासन की ओर से बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। बहस का वीडियो सामने आने के बाद सपा और कांग्रेस के बीच संबंधों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इस घटना पर इमरान मसूद या आशु मलिक की ओर से फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इमरान मसूद और आशु मलिक के बीच मतभेद कोई नई बात नहीं बताए जा रहे हैं। अलग-अलग मौकों पर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मुद्दों को लेकर असहमति सामने आती रही है। ऐसे में दिशा बैठक में हुई बहस को भी इसी राजनीतिक खींचतान की एक और कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
इमरान मसूद पहले समाजवादी पार्टी में रह चुके हैं और बाद में कांग्रेस में शामिल होकर सहारनपुर से लोकसभा चुनाव जीते। पिछले कुछ समय से वह सपा को लेकर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। उनके कई बयानों से कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन को लेकर उनकी असहजता भी सामने आई है। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में विपक्षी गठबंधन के दोनों प्रमुख दलों के नेताओं के बीच सामने आ रहे मतभेद चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।
यूपी की राजनीति में सपा और कांग्रेस के बीच सबसे बड़ा सवाल नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर है। राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में सपा खुद को सबसे मजबूत विपक्षी ताकत मानती है। दूसरी ओर कांग्रेस भी राज्य में अपना संगठन और राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे और गठबंधन की रणनीति पर दोनों दलों के बीच बातचीत आसान नहीं रहने वाली है। सहारनपुर की दिशा बैठक में हुई यह बहस भले ही एक स्थानीय बैठक का घटनाक्रम हो, लेकिन इसने यूपी में सपा-कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को एक बार फिर सार्वजनिक जरूर कर दिया है।