Jamiat Ulama-e-Hind ने गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों की मांग पर नियुक्त किया अधिवक्ता, मौलाना अरशद मदनी बोले- जांच एजेंसियां बगैर सुबूत धार्मिक पक्षपात के आधार पर युवाओं को गिरफ्तार करती हैं।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
सहारनपुर. देवबंद में जमीयत उलमा-ए-हिंद (Jamiat Ulama-e-Hind) ने लखनऊ से गिरफ्तार किए गए अलकायदा के दो आतंकियों की कानूनी मदद करने का ऐलान किया है। गिरफ्तार आतंकियों के परिजनों अनुरोध पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने आरोपियों को कानूनी मदद देने का फैसला किया है। जमीयत उलमा कानूनी इमदाद कमेटी अध्यक्ष गुलजार आजमी ने बताया कि आरोपियों के परिजनों की मांग पर मौलाना अरशद मदनी के आदेश पर अधिवक्ता फरकान खान को नियुक्त किया गया है।
बता दें कि लखनऊ से हाल ही में एटीएस ने आतंकी मसीरुद्दीन उर्फ मुशीर और मिनहाज अहमद को गिरफ्तार किया था। मिनहाज अहमद के पिता सिराज अहमद ने जमीयत उलमा-ए-हिंद को पत्र लिखकर कानूनी मदद गुहार लगाई है। जमीयत उलमा कानूनी इमदाद कमेटी अध्यक्ष गुलजार आजमी ने बताया कि आरोपियों के परिजनों का पत्र मिलने के बाद मौलाना अरशद मदनी के आदेश पर अधिवक्ता की नियुक्ति कर दी गई है। अधिवक्ता फुरकान खान को निर्देश दिए हैं कि वह कोर्ट से केस संबंधित दस्तावेज जैसे रिमांड रिपोर्ट, एफआईआर की कॉपी आदि दस्तावेज निकालें। मुकदमे की अगली सुनवाई में आरोपियों की तरफ फुरकान कोर्ट में मौजूद रहेंगे।
मौलाना अरशद मदनी ने बताया कि जमीयत ने अब तक सैकड़ों युवाओं को आतंकवाद के मुकदमों में रिहा कराया है। इससे पता चलता है कि जांच एजेंसियां बगैर सुबूत धार्मिक पक्षपात के आधार पर युवाओं को गिरफ्तार करती हैं और लंबे समय बाद कोर्ट उन्हें ससम्मान बरी कर देती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जांच एजेंसियों के इस रवैये से मुस्लिम युवाओं के कई साल बर्बाद हाेते हैं, उन्हें कौन लौटाएगा? इसी वजह से जमीयत ने फास्टट्रैक कोर्ट की मांग उठाई थी। उन्होंने कहा कि वास्तव में जो दोषी हैं, उसे सजा मिले। वहीं जो निर्दोष हैं, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्दोष मुसलमानों की ससम्मान रिहाई तक हम कानूनी संघर्ष करते रहेंगे।