मौलाना कारी मुस्तफा बोले- ये बहुत खास मुद्दा इसमें सभी धर्म के जजों को शामिल करना चाहिए
देवबंद. सुप्रीम कोर्ट में राम-मंदिर व बाबरी मस्जिद के मामले की सुनवाई करने के लिए एक ही मजहब के 5 जजों की खंडपीठ नियुक्त होने व जज ललित द्वारा इस केस से अपने को अलग करने पर देवबंदी उलेमा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को चाहिए की वह इस सुनवाई में हर मजहब के लोगों को शामिल करे। हर मजहब के जज यहां मौजूद हैं, यह एक आम मुद्दा नहीं है, बल्कि एक बहुत ही खास मुद्दा है। अगर कोई जज इस मामले में अपने आप को अलग करता है तो कहीं न कहीं कुछ काला है। इस मामले की जल्द से जल्द सुनवाई होनी चाहिए और जो भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा हम उसे ही मानेंगे।
इत्तेहाद उलेमा-ए-हिंद अध्यक्ष मौलाना कारी मुस्तफा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि वह 5 जजों की कमेटी में हर मजहब के लोगों को शामिल करे। हर मजहब के जज मौजूद हो तो तमाम मजहब के लोग मौजूद होंगे। यह मुद्दा कोई आम नहीं बड़ा खास मुद्दा है, जिससे हिंदुस्तानियों का अमनो-अमान जुड़ा हुआ है। इसलिए हकूमते ए हिंद को भी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को भी चाहिए कि वे इसमें अलग-अलग मजहब के जजों को रखें, ताकि वे उस पर सही ढंग से नजर रखें और पूरे मामले पर बहुत सोच समझ कर फैसला दें। हमें अपने सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है, जो भी फैसला आएगा सही और मुनासिब होगा। हक पर होगा और हक तभी होगा जब तमाम मजहब के जज इसमें मौजूद होंगे। किसी एक बिरादरी के लोगों को जमा करके या एक मजहब के जजों को जमा करके कोई फैसला सही नहीं आ सकता है। चीफ जस्टिस ललित अगर उससे हट रहे हैं तो मैं समझता हूं कि अगर कोई भी जज किसी मुकदमे से अपने आप को अलग करता है तो कहीं ना कहीं काला है।