- महाराणा प्रताप जयंती कार्यक्रम के मंच से दिया गया तर्क - शांत प्रकाश जाटव बाेले 1934 से पहले नहीं थे जाटव - सहारनपुर में संगीनाें के साये में संपन्न हुई जयंती - चप्पे पर तैनात किया पुलिस बल, कई रास्ते रहे बंद
सहारनपुर। देश में आज जातिवाद खाई का काम कर रहा है, वामपंथी साेच देश काे ताेड़ना चाहती है। राजपूत समाज जाति विशेष की नहीं बल्कि राष्ट्रवाद की साेच रखता है। देश में 1932 से पहले जाटव नहीं थे। यादवाें और राजपूताें से कनवर्ट हाेकर ही जाटव जाति बनी है। यादवाें और राजपूताें ने मिलकर 14 जुलाई 1932 काे जाटव जाति बनाई थी। यह बात गुरुवार काे यहां सहारनपुर में महाराणा प्रताप जयंती कार्यक्रम के मंच से कही गई। कार्यक्रमाें काे लेकर जिले में अलर्ट घाेषित रहा और उत्तर प्रदेश के पुलिस जवानाें के साथ-साथ पैरा मिल्ट्री फाेर्स सहारनपुर में लगाई गई थी। कई रास्ताें काे इस दाैरान बंद रखा गया।
इसकी वजह यह थी कि सहारनपुर पिछले दिनाें दलित बनाम राजपूत जातीय संघर्ष हाे गया था और जिला जातीय संघर्ष की आग में जलते-जलते बचा था। इसके बाद पिछले वर्ष 9 मई काे ही सहारनपुर में महाराणा प्रताप जयंती के दाैरान बवाल हाे गया था। मल्हीपुर राेड पर एक ओर महाराणा प्रताप जयंती समाराेह चल रहा था और दूसरी ओर रामनगर गांव में भीम आर्मी एकता मिशन के तत्कालीन जिलाध्यक्ष कमल वालिया के छाेटे भाई सचिन वालिया की गाेली लगने से माैत हाे गई थी। उस दाैरान भीम आर्मी समर्थकाें ने जिला अस्पताल में सचिन वालिया के शव काे रखकर जमकर हंगामा किया था और महाराणा प्रताप जयंती के प्राेग्राम में आए लाेगाें के अलावा तत्तकालीन एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह के खिलाफ तहरीर दी थी।
एक वर्ष बाद एक बार फिर से 9 मई काे मल्हीपुर राेड पर महाराणा प्रताप जयंती मनाई गई और रामनगर गांव में भीम आर्मी एकता मिशन के समर्थक सचिन वालिया का परिनिर्माण दिवस मनाया गया। दाेनाें कार्यक्रमाें के बीच एक किलाेमीटर की ही दूरी रही, यही कारण रहा कि यहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। यूपी पुलिस के साथ-साथ पैरा मिल्ट्री फाेर्स काे भी तैनात किया गया।
कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य वक्ता राजस्थान से आए राष्ट्रीय संयाेजक राजेंद्र सिंह नरुका ने कहा कि महाराणा प्रताप ने कभी जाति विशेष की लड़ाई नहीं लड़ी उन्हाेंने राष्ट्र के लिए लड़ाई लड़ी। उन्हाेंने यह भी कहा कि मर्यादा पुरुषाेत्तम भगवान श्री राम ने सबरी माता के झूठे बेर खाए थे ये ऐसे उदाहरण हैं जिनसे हमने सीखना चाहिए और साेच काे बड़ा करना चाहिए।
अन्र्तराष्ट्रीय कवि गजेंद्र सिंह साेलंकी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश काे जाेड़ने का आह्वान युवाओं से करते हुए देश के सभी लाेगाें से कहा कि एकजुट हाेकर उन्हे विदेशी ताकताें से लड़ने की तैयारी करनी चाहिए। कार्यक्रम में पहुंचे अखिल भारतीय हिंदू जाटव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं दलित चिंतक शांत प्रकाश जाटव ने ताे साफ कह दिया कि जाे लाेग यह कहते हैं कि राजपूत सूद्र जाति काे पसंद नहीं करते हुए उन्हे यह जान लेना चाहिए कि जाटव भी यादव और राजपूत ही हैं। देश में 1932 से पहले काेई जाटव नहीं था। 1932 में यादवाें और राजपूताें में से ही कुछ लाेग निकलकर जाटव बने। इसका उदाहरण उन्हाेंने इस तरह से दिया कि जहां जहां जाटवाें के माेहल्लें हाेंगे वहां आपकाें यादवाें के माेहल्ले नहीं मिलेंगे। पूर्व विधायक विरेंद्र सिंह ने कहा कि राजपूत जाति-पाति पर विश्वास नहीं करते और सभी काे अपना मानते हैं।
भीम आर्मी ने मनाया परिनर्वाण दिवस
महाराणा प्रताप जयंती समाराेह से कुछ ही दूरी पर भीम आर्मी समर्थकाें ने सचिन वालिया की बरसी मनाई जिसे उन्हाेंने परिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया। यहां तत्कालीन जिलाध्यक्ष और वर्तमान में भीम आर्मी के राष्ट्रीय सचिव कमल वालिया के छाेटे भाई काे श्रद्धाजंलि अर्पित की गई और आराेप लगाया गया है कि प्रशासन ने उन्हे कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी और कार्यक्रम में पहुंचने वाले लाेगाें काे भी राेका गया। दाेपहर दाे बजे के बाद पुलिस प्रशासन ने उस वक्त राहत की सांस ली जब एक बजे तक की अनुमति वाला महाराणा प्रताप जयंती का कार्यक्रम का दाे बजे समापन हाे गया। कार्यक्रम खत्म हाेते ही पूरे जिले में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई। कार्यक्रम में आए लाेगाें काे भी यह आग्रह किया गया कि घराें काे लाैटते वक्त वह किसी भी तरह की नारेबाजी नहीं करेंगे।
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