Patrika के विशेष कार्यक्रम person of the week में मिलिए आईपीएस ऑफिसर अर्पित विजयवर्गीय से
सहारनपुर।
"परिंदों को मिलेगी मंजिल यकीनन, ये फैले हुए उनके पंख बाेलते हैं वही लाेग रहते हैं खामोश अक्सर, जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं"
पत्रिका के विशेष कार्यक्रम person of the week में आज हम आपकी मुलाकात एक ऐसी ही पर्सनैलिटी से कराने जा रहे हैं। एक ऐसे आईआईटीयिन जिन्हाेंने लाखों कराेडों के पैकेज वाले रास्ते काे छोड़कर सिविल सर्विस काे चुना इस सप्ताह हम बात करेंगे 2017 बैच के आईपीएस ऑफिसर अर्पित विजय वर्गीय की। caa काे लेकर जब चारों ओर लाेगाें का गुस्सा सड़कों पर आया ताे (ट्रेनी) आईपीएस विजय वर्गीय अपनी शादी के प्राेग्राम में व्यस्त थे। जब वह लाैटे ताे ड्यूटी पर आते ही उन्हे मैसेज मिला कि देवबंद में हालात अच्छे नहीं हैं। भीड़ सड़कों पर है और लाेगाें का गुस्सा फूट सकता है।
इस सूचना के बाद वह एक मिनट भी घर नहीं रुके और देवबंद के लिए रवाना हाे गए। बताैर ऑफिसर यह उनका पहला टर्म था जब इतनी भीड़ काे काबू करना था, समझाना था और लाेगाें के बीच जाना था। अर्पित बताते हैं कि जब उन्हाेंनें भीड़ काे देखा ताे लगा कि इतनी भीड़ काे बिना बल प्रयोग किए कैसे काबू किया जा सकता है ? लेकिन अपनी परवाह किए बगैर वह भीड़ के बीच चले गए। मूल रूप से राजस्थान के काेटा के रहने वाले आईपीएस ऑफिसर अर्पित यह भी बताते हैं कि अभी तक उन्हे ट्रेनिंग में यह सब सिखाया ताे गया था लेकिन प्रैक्टिकल में भीड़ के बीच जाने और भीड़ काे राेकने यह पहला माैका था। ऐसे में उन्हे वह पंक्तियां याद आई जाे दाे दिन पहले ही एसएसपी दिनेश कुमार ने उन्हे बताई थी और कहा था कि ''जब हालात मुश्किल हाें ताे जूनियरटी-सीनयिरटी काे भूलकर अनुभव के आधार पर निर्णय लेने चाहिए और हमने फिर यही किया। इसी से सफलता भी मिली और एसपी देहात विद्या सागर मिश्र व एसपी सिटी विनीत भटनागर के साथ साथ इस दौरान अन्य लोगों का अनुभव काम आया और इस तरह हम भीड़ काे समझाने में भीड़ काे शांत करने में कामयाब भी हुए।
जीवन में एक घटना ने बदल दी राह
अर्पित विजयवर्गीय बताते हैं कि, आईआईटी में जब वह पढ़ाई कर रहे थए ताे उन्हाेंने कभी नहीं साेचा था कि सिविल सेवा में जाएंगे। वह भी अपने सीनियर की तरह दुनियाभर में जाकर लाखों कराेड़ाें के पैकेज की चाह रखते थे लेकिन वर्ष 2012 में उनके जीवन में एक ऐसा बदलाव आया जिसने उनकी राह ही बदल दी। अर्पित बताते हैं कि उनके सीनियर जाे लंदन में थे वहां से लाैटे और उन्हाेंने IAS की तैयारी की। उनमें दाे सीनियर आज IAS भी हैं। जब उनसे बात हुई ताे उन्हाेंने कहा कि लंदन में ताे थे पैकेज भी अच्छे थे लेकिन एक संतुष्टि जाे इस सर्विस में मिलती है वह वहां पर नहीं मिली। इसलिए प्रशासनिक और सिविल सेवा चुनने का रास्ता तय किया और फिर 2013 में सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए दिल्ली आ गए।