Raksha Bandhan 2024 भद्रा नक्षत्र का वास स्वर्ग लोक में, इसलिए धरती पर कोई प्रभाव नहीं।
( Raksha Bandhan 2024 ) रक्षा बंधन पर इस बार भद्रा नक्षत्र को लेकर तरह-तरह के विचार सामने आ रहे हैं। कुछ पंडितों का कहना है कि दोपहर डेढ़ बजे तक भद्रा नक्षत्र है इसलिए रक्षा बंधन दोपहर के बाद होगा। बहनें अपने भाई की कलाई पर दोपहर डेढ़ बजे के बाद ही राखी बांध सकेंगी लेकिन कुछ पंडितों ने इस विचार को मिथ्या करार दिया है। विचार है कि भद्रा नक्षत्र प्रथ्वी, स्वर्ग और आकाश में निवास करता है। इस बार वो स्वर्ग लोक है ऐसे में धरती पर उसका कोई प्रभाव नहीं रहेगा। वह जिस अवधि में जिस लोक में रहता है उसी लोक पर उसका प्रभाव पड़ता है। यानी इस बार भद्रा नक्षत्र तो है लेकिन इसका कोई प्रभाव धरती पर नहीं। ऐसे में शुभ मुर्हुत ( auspicious time ) सुबह से ही रहेगा और सुबह से ही बहनें भाईयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं।
तहसील शिव मंदिर सहारनपुर के अधिष्ठाता पंडित अभिषेक कृष्णात्रे का कहना है कि इस बार भद्रा नक्षत्र का कोई प्रभाव नही नहीं है। सुबह से ही बहनें अपने भाई को राखी बांध सकती हैं। वह खुद सुबह ही रक्षा सूत्र बंधवा रहे हैं। शिव बगलामुखी मंदिर के पुजारी आचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ का भी यही मत है। उनका कहना है कि भद्रा नक्षत्र के नाम पर लोगों को बरगलाया गया है। अधूरी जानकारी की वजह से इस तरह के मिथ्या विचार चल रहे हैं। भद्रा नक्षत्र इस बार धरती लोक पर ही नही हैं। इसलिए कोई प्रभाव भी धरती लोक पर नहीं है।
पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा नक्षत्र का कोई अशुभ फल नहीं है। इसलिए किसी भी तरह की शंका से परे होकर प्रातः काल से ही रक्षाबंधन मनाया जा सकता है। पंडित रोहित वशिष्ठ ने तर्क दिया कि ज्योतिष में पंचांग महत्वपूर्ण अंग है। इसमें से एक अंग का नाम करण है। कुल ग्यारह करण हैं जिनमें से एक करण का नाम विष्टि है। जो विष्टि करण हैं उसे ही भद्रा के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष सर्व संग्रह के अनुसार चन्द्रमा की राशि के आधार पर भद्रा को तीन वर्ग में विभाजित किया गया है। इस विभाजन के आधार पर ही भद्रा का वास स्वर्ग, पाताल और पृथ्वीलोक पर अलग-अलग माना गया है। ऐसे में भद्रा जहां होती है वहीं पर उसका अशुभ फल माना जाता है। इस वर्ष रक्षा बंधन पर चन्द्रमा के मकर राशि में स्थित होने के कारण भद्रा का वास स्वर्गलोक में है। इस कारण पृथ्वी पर इसका कोई दोष नहीं। यानी साफ है कि इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा का कोई दोष नहीं रहेगा।