Saharanpur couple suicide होटलों के बिल और सूदखोरों की महंगी ब्याज दर से सौरभ बना कर्जदार!
( Saharanpur couple suicide ) मानो या ना मानो पर ये सच है कि सहारनपुर के सर्राफ सौरभ बब्बर सुसाइड केस के पीछे हाई ब्याजदर के अलावा महंगे होटलों में किट्टी पार्टी और दिखावा भी काफी हद तक जिम्मेदार है। हम, ये नहीं कह रहे कि सौरभ ये सब करता था लेकिन जिन लोगों का पैसा उसने इकट्ठा किया था उनके लिए हर महीने महंगे होटलों में पार्टी अरेंज करना, इन पार्टियों के बड़े-बड़े बिलों का भुगतान करना और फिर ये दिखाना कि ये सब मामूली बाते हैं सौरभ की मजबूरी बन गया था।
सहारनपुर के युवा सर्राफ सौरभ बब्बर कर्ज के एक ऐसे दल-दल में फंस गए थे कि उन्हे अपनी पत्नी के साथ आत्महत्या करनी पड़ गई। सौरभ का शव पुलिस को गंगनहर से मिला है लेकिन उनकी पत्नी मोना बब्बर का पांच दिन बाद भी कोई पता नहीं चल सका है। इस घटना ने सभी को सन्न कर दिया है। सौरभ के इस कदम से एक परिवार का दुख सामने आ गया लेकिन ऐसे कई परिवार हैं जो इस दंपति के आत्महत्या करने की खबर सुनकर ही बेसुध हो गए। ये ऐसे परिवार हैं जिन्होंने अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा विश्वास के साथ सौरभ के हाथों में दिया था। विश्वास के रूप में दी गई ये रकम सात करोड़ से अधिक हो गई थी और अब सौरभ को करीब दस करोड़ का रुपये का कर्ज चुकाना था। ऐसे में उसने आत्महत्या का रास्ता चुन लिया लेकिन जिन परिवारों का पैसा सौरभ के साथ डूब गया उनका कहना है कि वो भी जैसे जीते-जी मर गए हैं।
एक बड़ा सवाल ये भी है कि जब सौरभ ने लोगों से करोड़ों रुपये इकट्ठा किया था तो वो कर्जदार कैसे बन गया! चर्चा है कि सौरभ ने इस रकम का एक बड़ा हिस्सा शेयर मार्केट ( MCX ) में इनवेस्ट किया था। हालांकि इसके कोई प्रमाण नहीं है लेकिन जो लोग सौरभ के करीबी थे उन्होंने अपनी पहचान छिपाए रखने की शर्त पर ये जानकारी दी है कि शेयर मार्केट में बड़ा नुकसान होने के बाद सौरभ कर्जदार होता चला गया। कुछ ऐसे सूदखोर जो शेयर मार्केट में पैसा लगाने के लिए 20 से 50 प्रतिशत की दर पर पैसा उधार देते हैं उन्होंने सौरभ को पैसा देना शुरू किया। सौरभ को लगा कि शेयर मार्केट में गए पैसे को वापस लाने का यही एक तरीका है लेकिन ये तरीका नहीं था बल्कि एक ऐसी दलदल थी जिसमें सौरभ फंसता चला गया। कर्जदार होने के बाद अब इन लोगों का ब्याज भरने की बारी थी। ऐसे लोगों का ब्याज भर-भरकर अब सौरभ खाली हो चुका था लेकिन दिखावा अभी बरकरार था। इसकी भी एक वजह थी, अगर सौरभ इस बात को उजागर कर देता कि वह कर्जदार हो चुका है तो जिन लोगों का करोड़ों रुपया उसने इकट्ठा किया था वो सौरभ के घर पर आकर बैठ जाते। ऐसे हालातों में अपनी सारी चल और अचल संपत्ति सौरभ को बेचनी पड़ जाती। इन हालातों में सौरभ को लगने लगा कि अब कोई रास्ता नहीं बचा है। उधर कथित सूदखोरों का दबाव बढ़ता जा रहा था जिसे ये दंपति झेल नहीं पाया और दोनों ने हरिद्वार जाकर गंगनहर में छलांग लगा दी।
पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। अभी तक सौरभ की पत्नी का शव नहीं मिल सका है। पुलिस का कहना है कि परिवार वाले अभी इस स्थिति में नहीं हैं कि उनसे गहनता से पूछताछ की जा सके। धीरे-धीरे जो तथ्य और जानकारी सामने आ रहे हैं उन्हे एकत्र किया जा रहा है। परिवार वाले अगर कोई तहरीर देते हैं तो उसके अनुसार जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।