Iqbal Bhatti: पाकिस्तान के लिए जासूसी में 17 साल सजा काट चुका इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल 11 महीने बाद डिपोर्ट हुआ। पटियाला से गिरफ्तारी के बाद सोमवार को कड़ी सुरक्षा में वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान को सौंपा गया।
Iqbal Bhatti: पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में 17 साल जेल काट चुके पाकिस्तानी नागरिक इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल को सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान भेज दिया गया। सजा पूरी होने के 11 महीने बाद मंत्रालयों की मंजूरी और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर यह कार्रवाई की गई।
Iqbal Bhatti: जासूसी के मामले में दोषी ठहराए गए पाकिस्तानी नागरिक इकबाल भट्टी को आखिरकार भारत से डिपोर्ट कर दिया गया। उसे सहारनपुर से कड़ी सुरक्षा में पंजाब के वाघा बॉर्डर के लिए रवाना किया गया। जहां सीमा पर औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई। सुरक्षा कारणों से उसके ले जाने के रूट और समय को गोपनीय रखा गया।
रवाना करने से पहले जिला अस्पताल में उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। मेडिकल के दौरान इकबाल ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि उस पर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई।
इकबाल भट्टी को 8 अगस्त 2008 को पंजाब के पटियाला में गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से सेना से जुड़े संवेदनशील नक्शे बरामद होने का दावा किया गया था। जांच में सामने आया कि वह सहारनपुर के हकीकत नगर में देवराज सहगल नाम से रह रहा था। उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वोटर आईडी, पैन कार्ड, राशन कार्ड बनवाए और बैंक खाता भी खुलवाया था। इस संबंध में बैंक अधिकारियों की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ था। उसके खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट और विदेशी अधिनियम समेत कई गंभीर धाराओं में केस चला।
सहारनपुर अदालत से सजा मिलने के बाद सुरक्षा कारणों से उसे गौतमबुद्धनगर जिला जेल में रखा गया। क्योंकि सहारनपुर जेल के पास सेना का कैंप है। अलग-अलग मामलों में वह करीब 17 वर्ष तक जेल में बंद रहा। करीब 11 महीने पहले उसकी सजा पूरी हो चुकी थी। इसके बाद जेल प्रशासन ने डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की।
पुलिस, एलआईयू, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के बीच पत्राचार के बाद और पाकिस्तानी दूतावास से समन्वय स्थापित होने पर उसे स्वदेश भेजने का फैसला लिया गया। सोमवार को सभी औपचारिकताएं पूरी कर उसे पाकिस्तान रवाना कर दिया गया।