देश की आजादी के बाद यह सीट 6 बार कांग्रेस, 6 बार सपा और पांच बार बसपा के खाते में गई। वर्ष 1993 में सिर्फ एक बार यह सीट गई थी भाजपा के खाते में
सहारनपुर। UP Assembly Election 2022 सहारनपुर देहात विधानसभा सीट एक ऐसी सीट है जिसका इतिहास अपने आप में अलग है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती इस सीट से दो बार चुनाव लड़ी और राष्ट्रीय स्तर पर इस सीट को पहचान दिलाई।
इस सीट की एक खास बात यह भी है कि यहां से सर्वाधिक महिलाओं ने चुनाव लड़ा। वर्ष 1957 में इस सीट का गठन हुआ और उस समय इस सीट को हरोड़ा विधानसभा नाम दिया गया। सबसे पहले यह सीट कांग्रेस की झोली में गई और यहां से कांग्रेस प्रत्याशी जय गोपाल ने जीत दर्ज की थी। इस सीट ने महिलाओं को खासा सम्मान दिया। 1967 में शकुंतला देवी इस सीट ऐसी प्रत्याशी थी जो लगातार तीन बार जीती। इसी सीट से विमला राकेश भी चुनाव लड़ी और चार बार विधायक रही। वर्ष 1993 में भाजपा प्रत्याशी मोहर सिंह ने इस सीट पर महिलाओं की लगातार जीत को रोका। महिलाओं के विजय रथ को ब्रेक लगाई और जय गोपाल इस सीट से जीते हालांकि अगले ही चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती इसी सीट से जीती और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी।
वर्ष 2012 में बदल गया इस सीट का नाम
सहारनपुर देहात विधानसभा सीट का नाम वर्ष 2012 में पहली बार बदला। जब वर्ष 2012 में विधानसभाओं का परिसीमन हुआ तो हरोड़ा विधानसभा सीट का नाम बदलकर सहारनपुर देहात हो गया और वर्ष 2012 में जब यहां चुनाव हुए तो जगपाल यहां से विधायक बने। इसके बाद वर्ष 2017 में जब चारों ओर भाजपा की आंधी चल रही थी उस समय यह सीट कांग्रेस के खाते में गई और मसूद अख्तर यहां से विधायक बने।
सहारनपुर देहात सीट 1957 से अब तक
वर्ष 1957 में कांग्रेस के जय गोपाल विधायक बने
1962 में कांग्रेस से फिर जय गोपाल विधायक बने
1967 में कांग्रेस से शकुंतला देवी विधायक बनी
1969 में फिर कांग्रेस से शकुंतला देवी विधायक बनी
1974 में कांग्रेस से फिर शकुंतला देवी विधायक बनी
1977 में सपा से विमला राकेश विधायक बने
1980 में सपा से विमला राकेश विधायक बनी
1985 में सपा से विमला राकेश विधायक बनी
1989 में सपा से विमला राकेश विधायक बनी
1991 में सपा से विमला राकेश विधायक बनी
1993 में भाजपा से मोहर सिंह विधायक बने
1996 में बसपा से मायावती विधायक बने
1998 में उपचुनाव में बसपा से जगपाल सिंह विधायक बने
2002 में बसपा से मायावती विधायक बनी
2003 में सपा से विमला राकेश विधायक बनी
2007 में बसपा से जगपाल सिंह विधायक बने
2017 में कांग्रेस से मसूद अख्तर विधायक बने