
सहारनपुर। 'Police कुछ भी कर सकती है' सहारनपुर के एक दरोगा ( police sub inspector ) ने यह बात साबित कर दिखाई है। आपको जानकर हैरानी होगी कि सहारनपुर के बड़गांव थाने में तैनात एक दरोगा ने 21 साल पहले मर चुके दाे भाइयों पर लॉक डाउन उल्लंघन के आरोपों में मुकदमा दर्ज कर दिया। मुकदमे की जांच करने के लिए जब पुलिस गांव पहुंची तो इस बात का पता चला कि जिन लोगों के मुकदमे में नाम दर्ज हैं उनकी मौत 21 साल पहले हो चुकी है।
गांव के लोगों ने दरोगा के इस कारनामे की शिकायत एसएसपी ( saharanpur ssp ) से की है। ग्रामीणों ने एसएसपी दिनेश कुमार पी को बताया कि दरोगा ने जिन दो भाइयों के नाम मुकदमे में दर्ज किए हैं उनमें से एक की मौत 21 साल पहले हो चुकी है और दूसरे की मौत 13 साल पहले हो चुकी है। दरोगा की इस कार्यवाही ने सहारनपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूरी घटना बड़गांव थाना क्षेत्र के टपरी गांव की है। इसी गांव में 15 मई को जमीनी विवाद के चलते दो पक्षों में मारपीट हो गई थी। इस मामले में दरोगा ने एक पक्ष से सतीश विजयपाल व मिलाप पुत्रगण मूलचंद सहित उनके दो भाई देवी सिंह व ओमपाल के खिलाफ धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमे में आरोप लगाए गए थे कि इन्होंने लॉक डाउन का उल्लंघन किया और लॉकडाउन में सभी लोग इकट्ठा हुए जिससे भीड़ लग गई।
जब इस मुकदमे की जांच के लिए पुलिस गांव पहुंची तो पता चला कि देवी सिंह की मृत्यु 21 साल पहले हो चुकी है और उसके भाई ओमपाल की मौत भी 13 साल पहले कैंसर से हो गई थी। जब परिवार वालों को पता चला कि पुलिस ने 21 साल पहले और 13 साल पहले मर चुके भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है तो ग्रामीणों ने अफसरों से शिकायत की।
इस घोर लापरवाही की जांच अब देवबंद पुलिस क्षेत्राधिकारी रजनीश उपाध्याय को दी गई है। उन्हाेंने दरोगा को इस मामले में नोटिस भेजकर अपने बयान दर्ज कराने के लिए कहा है लेकिन अभी दरोगा ने अपने बयान दर्ज नहीं कराए हैं। सीओ रजनीश उपाध्याय का कहना है कि पूरे मामले की जांच कर लापरवाही किस स्तर पर हुई है रिपोर्ट अधिकारियों को प्रेषित की जाएगी।
पुलिस जांच में जो भी तथ्य सामने आए लेकिन यह तो तय है कि दरोगा की इस लापरवाही ने पूरे सहारनपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक बार फिर यह सवाल सिर उठा रहा है कि क्या पुलिस के दरोगा आज भी बिना जानकारी किए ही पर्चे काट देते हैं और घर पर बैठकर ही जांच कर देते हैं।