पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत ने जो फैसला सुनाया वह परिवार की महिला को मंजूर नहीं था। जब पंचों ने महिला की बात नहीं सुनी तो इससे क्षुब्ध होकर महिला ने अपनी जान दे दी।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की यह घटना बताती है कि गांव देहात में आज भी महिलाओं यानी आधी आबादी की बातों को अहमियत नहीं दी जाती। पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर बुलाई गई पंचायत ने परिवार की महिला की बात को अनसुना कर फैसला सुना दिया। महिला पंचों के इस फैसले से इतनी नाराज हुई कि उसने अपनी जान दे दी। जब परिवार ने महिला को फांसी के फंदे पर लटका हुआ देखा तो सभी सन्न रह गए। पुलिस ने इस पूरे मामले में जांच शुरू कर दी है महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया है।
महिला ने चेताया था मैं जान दे दूंगी ...
यह पूरी घटना सहारनपुर के अंबेटा कस्बा क्षेत्र के गांव खेड़ा अफगान की है। इसी गांव के रहने वाले रतनपाल का अपने बड़े भाई के साथ पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। गुरुवार को गांव के ही प्रधान के घर पर इस मामले को लेकर एक पंचायत बुलाई गई। पंचायत में दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी। बताया जाता है कि रतनपाल थोड़ी कम जमीन लेने के लिए मान गया लेकिन उसकी पत्नी सुनीता इस फैसले से नाराज थी।
फैंसला सुनते ही कर लिया था जान देने का फैंसला
पंचायत के फैसला सुना कर उठ जाने के बाद रतनपाल अपने बेटे के साथ पहुंचा और अपनी 50 वर्षीय पत्नी सुनीता को पंचायत का निर्णय बताया। सुनीता ने पंचों फोन किया और कहा कि अगर फैसला बराबर ना हुआ तो है जान दे देगी। इस पर पति-पत्नी के बीच विवाद हो गया। गुस्से में पति ने कह दिया कि पंचायत का निर्णय तो हर हालत में मानना होगा, जान देनी है तो दे दे। इसके बाद परिवार के सब लोग इधर-उधर अपने काम में लग गए। ग्रामीणों के मुताबिक इस घटना से सुनीता इतनी क्षुब्ध हुई कि, उसने घेर में खड़े पेड़ पर रस्सी से फंदा बनाया और उसी से लटककर जान दे दी।
पुलिस जांच में जुटी
सुनीता की मौत को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। प्राथमिक तौर पर जो बात सामने आ रही है उसके आधार पर पुलिस ने अपनी जांच पड़ताल शुरू कर दी है। कोतवाली प्रभारी राजेंद्र कुमार वशिष्ठ का कहना है कि मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया है। पुलिस ने अपनी प्राथमिक जांच पड़ताल शुरू कर दी है तहरीर के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।