Sambhal News: संभल में मार्च की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने गेहूं की फसल पर संकट खड़ा कर दिया है। बढ़ते तापमान के कारण खासकर 15 दिसंबर के बाद बोई गई फसल पर दाना भराव प्रभावित होने और उत्पादन में करीब 10% तक कमी की आशंका जताई जा रही है।
March Heat Wheat Yield Sambhal: संभल जनपद में मार्च की शुरुआत से ही तापमान ने पांच वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस अचानक बढ़ी गर्मी ने गेहूं की फसल के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। वर्तमान में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा रहा है, जबकि अगले सप्ताह इसके 33 से 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
यह स्थिति विशेष रूप से उस 15 प्रतिशत गेहूं फसल के लिए चिंताजनक है, जिसकी बुवाई 15 दिसंबर के बाद की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता तापमान दाना भरने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, जिससे उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
इस समय गेहूं की फसल दाना पड़ने, दूध पड़ने और पकने की महत्वपूर्ण अवस्था में है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस चरण में दिन का तापमान 23 से 28 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 12 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना अनुकूल होता है। ऐसी स्थिति में दाना पूरी तरह विकसित होकर वजनदार बनता है।
लेकिन वर्तमान में अधिकतम तापमान 32 डिग्री तक पहुंच चुका है, जो सामान्य से अधिक है। यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो दाना भरने की अवधि कम हो सकती है, दाने का आकार छोटा रह सकता है और फसल समय से पहले पक सकती है, जिससे कुल उपज प्रभावित होने की आशंका है।
जनपद में लगभग 140 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती की जाती है। एक नवंबर से 15 दिसंबर के बीच बोई गई फसल पर तापमान वृद्धि का असर अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है, क्योंकि वह फसल अब मजबूत अवस्था में पहुंच चुकी है। लेकिन 15 दिसंबर के बाद बोई गई फसल अभी पूर्ण दाना विकास की अवस्था में है और उस पर तापमान वृद्धि का दबाव अधिक रहेगा।
पिछले वर्ष भी मार्च के पहले सप्ताह में अधिकतम तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 16 से 20 डिग्री सेल्सियस रहने से देर से बोई गई फसल को नुकसान हुआ था। वर्ष 2021 से 2024 तक तापमान में 2 से 3 डिग्री की लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो बदलते मौसम के संकेत दे रही है।
संभल जिले में औसतन 564 हजार टन गेहूं का उत्पादन होता है, जो प्रति हेक्टेयर लगभग 40.33 क्विंटल की उत्पादकता दर्शाता है। यह उत्पादन सामान्य मौसम परिस्थितियों में संभव हो पाता है। यदि मार्च माह में तापमान सामान्य से अधिक बना रहता है तो इस औसत उत्पादकता पर सीधा असर पड़ सकता है।
कृषि विभाग के अनुसार समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और नियंत्रित सिंचाई से उत्पादन को संतुलित रखा जा सकता है, लेकिन विलंबित बुवाई की स्थिति में उच्च तापमान उपज को कम कर सकता है।
जिला कृषि वैज्ञानिक डॉ. महावीर सिंह ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनके अनुसार यदि फसल बड़ी हो चुकी है और बालियां निकल आई हैं तथा तेज हवा चल रही है, तो अधिक सिंचाई से फसल गिरने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में सीमित मात्रा में हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
वहीं यदि फसल अभी अपेक्षाकृत छोटी है और हवा की गति सामान्य है, तो नियमित सिंचाई की जा सकती है। देर से बोई गई फसल में दाना भराव बेहतर बनाए रखने के लिए एक अतिरिक्त सिंचाई लाभकारी साबित हो सकती है, जिससे तापमान के दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सके।
लगातार बढ़ता तापमान और मार्च में असामान्य गर्मी भविष्य के लिए चिंता का विषय बन रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह तापमान में वृद्धि होती रही तो गेहूं उत्पादन की रणनीति में बदलाव आवश्यक होगा।
किसानों को मौसम की सटीक जानकारी पर आधारित खेती, उन्नत बीजों का चयन और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना होगा। फिलहाल संतुलित सिंचाई, खेत में नमी बनाए रखना और फसल की निरंतर निगरानी ही इस संकट से निपटने का प्रभावी उपाय माना जा रहा है।