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मुरादाबाद के पीतल कारोबार पर ‘डबल अटैक’: टैरिफ के बाद अब युद्ध ने बिगाड़ा 11,000 करोड़ का बिजनेस!

Moradabad News: अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष का असर अब मुरादाबाद के 11,000 करोड़ रुपये के हस्तशिल्प निर्यात पर साफ दिख रहा है।

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war impact moradabad brass industry crisis

मुरादाबाद के पीतल कारोबार पर 'डबल अटैक' (Image - Freepik)

Moradabad Brass Industry Crisis: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब सीधे वैश्विक लॉजिस्टिक नेटवर्क पर दिखाई देने लगा है। युद्ध और पलटवार की घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री और हवाई मार्गों में अस्थिरता बढ़ गई है। इसका सीधा प्रभाव भारत के निर्यात केंद्र मुरादाबाद पर पड़ा है, जहां से हर साल लगभग 11 हजार करोड़ रुपये के हस्तशिल्प उत्पाद दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजे जाते हैं।

इनमें करीब 5 हजार करोड़ रुपये का निर्यात केवल अमेरिका को होता है। पहले अमेरिकी टैरिफ को लेकर जो अनिश्चितता थी, वह कुछ दिनों के लिए कम हुई थी, लेकिन अब युद्ध की वजह से हालात फिर गंभीर होते दिख रहे हैं।

जेबेल अली पोर्ट पर रोक से शिपमेंट अटके

यंग एंटरप्रेन्योर्स सोसाइटी (वाईएएस) के चेयरमैन जेपी सिंह के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात की प्रमुख लॉजिस्टिक कंपनी DP World ने हाल ही में क्षेत्रीय हालात को देखते हुए दुबई के प्रमुख बंदरगाह Jebel Ali Port पर एहतियातन संचालन अस्थायी रूप से रोकने की सूचना जारी की है।

यह बंदरगाह एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का अहम केंद्र माना जाता है। इसके अलावा, जेनेवा स्थित वैश्विक शिपिंग कंपनी Mediterranean Shipping Company (MSC) ने मध्य-पूर्व के लिए विश्वव्यापी कार्गो बुकिंग अगली सूचना तक निलंबित कर दी है। इससे मुरादाबाद के निर्यातकों के कंटेनर फंसने लगे हैं और नए ऑर्डर की बुकिंग में भी अनिश्चितता पैदा हो गई है।

एयर कार्गो में देरी से डिलीवरी शेड्यूल प्रभावित

केवल समुद्री मार्ग ही नहीं, बल्कि हवाई कार्गो सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। मध्य-पूर्व के कई हवाई क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से रूट डायवर्जन और अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस और कुरियर कंपनियों का अनुमान है कि एशिया-प्रशांत, यूरोप और अमेरिका के लिए जाने वाले कार्गो में 24 से 48 घंटे तक की देरी संभव है। इससे समयबद्ध डिलीवरी पर निर्भर निर्यातकों के सामने अनुबंध तोड़ने और पेनल्टी का खतरा बढ़ गया है।

लंबे वैकल्पिक मार्गों से बढ़ सकती हैं माल ढुलाई दरें

लॉजिस्टिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए और जहाजों को लंबा वैकल्पिक समुद्री मार्ग अपनाना पड़ा, तो ट्रांजिट टाइम बढ़ेगा। इससे एयर फ्रेट और सी फ्रेट दोनों की दरों में उछाल आ सकता है। डिलीवरी शेड्यूल पर दबाव बढ़ने के साथ ही निर्यातकों की कार्यशील पूंजी भी लंबे समय तक फंसी रह सकती है। कंपनियां फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और जैसे ही हालात सुधरेंगे, सेवाएं बहाल करने का भरोसा दे रही हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य का खतरा और मेंथा उद्योग की चिंता

ईरान से जुड़े अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने और इसके संभावित बंद होने की आशंका ने उत्तर प्रदेश के रामपुर और संभल के मेंथा निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट की गति धीमी पड़ सकती है।

रामपुर से हर साल लगभग 1700 करोड़ रुपये और संभल से करीब 3,100 करोड़ रुपये मूल्य का मेंथा और उससे जुड़े उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। अमेरिका के अलावा स्पेन, इटली, चीन, ब्राजील, कोरिया और ताइवान जैसे देशों में इसकी भारी मांग रहती है। युद्ध के चलते यदि इन देशों से ऑर्डर में कमी आती है या शिपमेंट में बाधा आती है, तो मेंथा उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है।

टैरिफ के बाद युद्ध की दोहरी मार

पहले अमेरिकी टैरिफ नीति के कारण निर्यातकों को कीमत और प्रतिस्पर्धा की चुनौती झेलनी पड़ी थी। अब युद्धजनित अस्थिरता ने लॉजिस्टिक लागत और समय-सीमा दोनों को संकट में डाल दिया है। मुरादाबाद का हस्तशिल्प उद्योग और रामपुर-संभल का मेंथा कारोबार, दोनों ही अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर हैं। ऐसे में वैश्विक तनाव का हर उतार-चढ़ाव सीधे स्थानीय कारोबारियों की आय, रोजगार और उत्पादन पर असर डाल रहा है।