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UCC के नाम पर थोपा जा रहा हिंदू कोड: संभल सांसद बर्क की सरकार को चेतावनी, बताया मौलिक अधिकारों का हनन

Sambhal News: संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है।
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Apr 07, 2026
sambhal ziaur rahman barq on ucc row
संभल सांसद बर्क की सरकार को चेतावनी | Image - FB/@ziaurrahmanbarq

Ziaur Rahman Barq on UCC: समाजवादी पार्टी के संभल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने संभल स्थित अपने आवास पर मीडिया से मुखातिब होते हुए स्पष्ट किया कि भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है, न कि कोई धार्मिक राष्ट्र। बर्क ने जोर देकर कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को अपनी मान्यताओं के अनुसार जीने का अधिकार देता है, जिसे सरकार अपनी 'हठधर्मिता' से कुचल नहीं सकती।

अनुच्छेद 25 का हवाला

सांसद बर्क ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उन दावों पर मुहर लगाई, जिनमें कहा गया है कि UCC के बहाने असल में मुसलमानों पर हिंदू कोड थोपने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का जिक्र करते हुए कहा कि यह अनुच्छेद हर वर्ग को अपने धर्म को अपनाने और उसके अनुसार आचरण करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान करता है। बर्क के अनुसार, जब तक संविधान मौजूद है, किसी भी समुदाय को उनके धार्मिक कानूनों (शरीयत) से अलग होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

शरीयत बनाम समान नागरिक संहिता

नखासा क्षेत्र में स्थित अपने निवास पर चर्चा के दौरान बर्क ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कोई साधारण संस्था नहीं, बल्कि शरीयत के कानूनों की संरक्षक है। उन्होंने सवाल किया, "जब देश में अन्य सभी नागरिक कानून सबके लिए समान हैं, तो फिर धार्मिक और निजी कानूनों को जबरन एक समान करने की आवश्यकता क्या है?" उनके अनुसार, शरीयत के कानूनों में हस्तक्षेप करना सीधे तौर पर धार्मिक स्वतंत्रता में दखलंदाजी है।

सरकार पर आरोप

जियाउर्रहमान बर्क ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह एक विशेष विचारधारा को जबरदस्ती थोपकर मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि सत्ता को अपनी 'जिद' छोड़नी चाहिए और देश की विविधता को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। सांसद ने आगाह किया कि धार्मिक आजादी पर किसी भी तरह का प्रहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वह इस मुद्दे पर मुस्लिम समाज की आवाज को मजबूती से उठाना जारी रखेंगे।

लोकतंत्र की गरिमा और भविष्य की चुनौतियां

सांसद बर्क ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि भारत की खूबसूरती इसकी 'अनेकता में एकता' है, जिसे एक समान कानून के नाम पर नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर आम सहमति बनाने के बजाय एकतरफा फैसला लेने की कोशिश की, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध होगा। बर्क के अनुसार, देश को आज विकास और सौहार्द की जरूरत है, न कि ऐसे कानूनों की जो समाज के बीच दरार पैदा करें। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका और देश की जागरूक जनता संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएगी।

Updated on:
07 Apr 2026 08:07 pm
Published on:
07 Apr 2026 08:07 pm