महागठबंधन में ये सीटें इस खाते में जाएगी
पूर्वान्चल की राजनीति में दशकों से कायम बाहुबली पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी का परिवार इस बार लोकसभा चुनाव में भी जोरदार मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा। विधानसभा चुनाव में लहर के बावजूद बीजेपी प्रत्याशी से विधानसभा की सीट छीनने वाला यह परिवार इस बार लोकसभा की दो अलग-अलग सीटों पर मजबूत दावेदारी कर रहा। बसपा के सिम्बल पर चुनाव मैदान में उतरने को तैयार इन दोनों प्रत्याशियों ने जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है। माना जा रहा कि गठबंधन इन दोनों सीटों को बसपा की झोली में डाल देगा।
लोकसभा 2019 में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, निषाद दल, पीस पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल सहित तमाम छोटी-बड़ी पार्टियां एकजुट हो मैदान में आने को तैयार हैं। इस चुनाव में एकजुट यह दल बीजेपी हटाओ फॉर्मूले पर काम कर रही है। इसके लिए गठबंधन हर सीट पर ऐसे प्रत्याशी को उतारने की फिराक में है जो जीत दिला सके। इसके लिए गठबंधन के बड़े नेता किसी भी दल के प्रत्याशी पर अपना दांव खेलने पर मंथन कर रहे। गठबंधन दलों के नेताओं का मानना है कि इस बार गठबंधन दल किसी प्रत्याशी विशेष के लिए नहीं मिलकर कौन जीतने की स्थिति में है इस पर नजर रखे हुए है।
चूंकि, गठबंधन को सामाजिक समीकरण को भी साधना है इसलिए बाहुबली पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी को खास तवज्जो मिल सकता है। वजह यह कि पूर्वान्चल में ब्राह्मणों में हरिशंकर तिवारी एक सर्वमान्य नाम है। दूसरा जिन सीटों पर इनके परिवार के सदस्य दावा कर रहे वहां से ये लोग प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो पंडित हरिशंकर तिवारी को आगे करने से विपक्ष को एक और लाभ हो सकेगा। वह यह कि अगड़े वोटर्स का एक धड़ा वह प्रभावित कर सकते हैं। सभी जानते हैं कि दशकों से पूर्वान्चल विशेषकर ब्राह्मण-ठाकुर के वर्चस्व की लड़ाई मंदिर (गोरखनाथ मंदिर) और हाता (पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी का आवास) के बीच सिमटी रहती है। ऐसे में ठाकुर वोट का ध्रुवीकरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वजह बीजेपी अपनी ओर करेगी तो विपक्ष इस परिवार को तवज्जो देकर ब्राह्मण वोट को बटोरने की कोशिश कर सकता है।
इन सीटों पर बसपा से कर रहे दावेदारी
पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बड़े सुपुत्र भीष्म शंकर तिवारी उर्फ कुशल तिवारी संतकबीरनगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं। बीते चुनाव में वह हर गए थे। लेकिन इस बार फिर वह पूरे जोश से लगे हुए हैं। वहीं, पूर्व मंत्री के भांजे व पूर्व विधानपरिषद सभापति गणेश शंकर पांडेय महराजगंज लोकसभा क्षेत्र में लगे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार बसपा सुप्रीमों ने इन लोगों को क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ाने के लिये हरीझंडी दी है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो सका है कि गठबंधन के संयुक्त घोषणा में कहां से कौन प्रत्याशी होगा लेकिन इस परिवार के सपा-कांग्रेस या बसपा के शीर्ष नेतृत्व से रिश्ते से यह अंदाजा लगाया जा रहा कि विपक्ष को इन चेहरों पर दांव लगाने में कोई आपत्ति नहीं होने जा रही।