55 अध्यापकों की अंकसूची संदेहास्पद, अभिलेखीय त्रुटि के मामले में भी कर्मचारी हो रहे परेशान
सतना. स्कूल शिक्षा विभाग ने अध्यापकों को नए सिरे से शैक्षिक संवर्ग में नियुक्ति की प्रक्रिया लागू की। इसके तहत जिले में 8263 अध्यापक संवर्ग के कर्मचारियों को शैक्षिक संवर्ग में नियुक्ति देनी थी। विभागीय निर्देशों के अनुसार 7353 कर्मचारियों को राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग में नियुक्ति प्रदान कर दी गई लेकिन 910 अध्यापक संवर्ग के लोगों का अभी तक शिक्षक संवर्ग में नियोजन नहीं हो सका है। इसमें न्यायालयीन प्रकरण, अंकसूची संदिग्ध होना, विभागीय कार्रवाई और अभिलेखीय कमी के मामले सामने हैं। इन मामले में कई ऐसे हैं जिनका निराकरण डीईओ कार्यालय को कर अभी तक शिक्षक संवर्ग में नियुक्ति दे देनी थी पर लालफीताशाही के कारण निराकरण नहीं हो पा रहा। लिहाजा शिक्षक परेशान हो रहे हैं।
यह है स्थिति
जिले में 434 वरिष्ठ अध्यापकों को शिक्षक संवर्ग में नियुक्त करना था। इसके विरुद्ध 419 को शिक्षक संवर्ग में नियुक्ति दी जा सकी है। शेष 15 में 10 मामले न्यायालयीन प्रकरण, 2 में वेतन वृद्धि बंद होना, 3 में पत्रोपाधि प्रशिक्षण प्रमाण पत्र का सत्यापन न होने से लंबित है। इसी तरह से 2244 अध्यापकों में 1926 को शिक्षक संवर्ग में नियुक्ति दी जा चुकी है। शेष 318 में 73 नियुक्ति में लोकायुक्त न्यायालयीन प्रकरण, 6 में न्यायालयीन प्रकरण, 10 की अंकसूचियां संदिग्ध, 59 में अभिलेखीय कमी तथा 170 नियुक्ति में प्रचलित प्रकरण है। 5585 सहायक अध्यापकों में से 5008 को शिक्षक संवर्ग में नियुक्त किया जा चुका है। 477 में 417 नियुक्ति में लोकायुक्त न्यायालयीन प्रकरण, 18 न्यायालयीन प्रकरण, 45 की अंकसूचियां संदिग्ध, 45 अभिलेखीय कमी व 52 नियुक्ति के लिए प्रचलन में लंबित है। इस तरह से 910 अध्यापक संवर्ग का शिक्षक संवर्ग में नियुक्ति नहीं हो सकी है।
इन मामले में डीईओ कार्यालय लापरवाह
ऐसा नहीं कि सभी मामले लंबित रहने चाहिए। जानकारों का कहना है कि न्यायालयीन प्रकरणों, विभागीय जांच और कार्रवाई को छोड़ दिया जाए तो शेष का निराकरण तत्काल किया जाकर संबंधितों को शिक्षक संवर्ग में नियुक्ति दी जा सकती है। मसलन अभिलेखीय कमी के मामलों को जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय से कमी की पूर्ति की जाकर सुधार के लिए प्रकरण प्रस्तुत किए जा सकते हैं। इसी तरह से जो अंकसूचियों के संदिग्ध होने के मामले में हैं, इसमें भी जिनके सही हैं उन्हें भी नियुक्ति के लिए प्रकरण प्रस्तुत किए जा सकते हैं लेकिन डीईओ कार्यालय का लिपिकीय अमला अधिकारी की अनदेखी के कारण चुप्पी साधे बैठा है और दूसरी ओर अध्यापक अपनी शिक्षक संवर्ग में नियुक्ति को लेकर परेशान हैं ।
अभी प्रभार में फंसा मामला
डीईओ कार्यालय से यह जानकारी सामने आई है कि मामले में अभी लिपिकीय प्रभार का भी मामला अटका हुआ है। अभी तक संबंधित लिपिक ने प्रभार नए लिपिक को नहीं सौंपा है। इस वजह से भी प्रकरणों को आगे नहीं बढ़ाया जा सका है। इस मामले में भी अधिकारी की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं।