
मधुबन हाउसिंग बोर्ड स्थित कपड़ों के तीन मंजिला शोरूम में देर रात लगी आग, मचा हडक़ंप
सतना. जिले के औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में स्थापित व्यावसायिक, शिक्षण व अन्य संस्थानों में अग्निकांड रोकने के लिए न जिला प्रशासन गंभीर और न नगर निगम। प्रदेश में अग्नि सुरक्षा अधिनियम लागू है लेकिन दमकल विभाग के पास फायर सेफ्टी मानकों का पालन न करने वाली संस्थाओं पर दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में विभाग की जिम्मेदारी महज आग बुझाने और संस्थाओं को जागरुक करने तक सिमट कर रह गई है।
सूरत के कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्नि हादसे के बाद निगम के दमकल अधिकारी ने शहर के औद्योगिक-व्यावसायिक भवनों, कोचिंग सेंटर तथा होटलों की जांच कर अग्नि सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की ऑडिट की थी। जांच के दौरान फायर सेफ्टी शाखा द्वारा 43 संस्थानों में जाकर आग से सुरक्षा के मानका परखे गए थे। इनमें से किसी भी संस्था में आपात स्थिति में संस्था से बाहर निकलने के लिए आपातकालीन द्वार तक नहीं मिले थे। आग से सुरक्षा के एक भी मापदंड का पालन न होने से फायर अधिकारी ने संस्थाओं में तालाबंदी भी की पर दंडात्मक कार्रवाई का कोई स्पष्ट नियम न होने से फायर विभाग को पीछे हटना पड़ा।
उद्योग उड़ा रहे सुरक्षा मानकों की धज्जियां
अग्निशमन विभाग उद्योगों और भवनों में अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाने के लिए सिर्फ सलाह देने तक सीमित है। यही कारण है कि उद्योगों व अन्य स्थानों पर मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विभाग किसी उद्योग या संस्थान के भवन का निरीक्षण ही कर सकता है। ऐसा उद्योग प्रबंधन या संस्थान के अधिकारियों के बुलाने पर ही हो सकता है। विभाग उद्योग प्रबंधन और अन्य भवन मालिकों को उपकरण लगाने और उनकी क्षमता व संख्या के संबंध में सलाह देने का कार्य कर सकता है। यदि कहीं नियमों की अवहेलना हो रही है तो विभाग सिर्फ ऐसा न करने के लिए कह सकता है।
जांच में यह मिली थी कमियां
शहर में अधिकांश कोचिंग सेंटर बिना लाइसेंस के संचालित हंै। यह जिन भवनों में चल रहे हंै वहां न आपातकालीन निकासी द्वार है और न ही किसी प्रकार के फायर सेफ्टी उपकरण। जांच में होटलों भी आग के ढेर में संचालित होते मिले। रीवा रोड के एक होटल में जांच के दौरान एक दर्जन घरेलू गैस सिलेंडर मिले थे। होटल संचालक के पास न फायर एनओसी थी और न फायर सुरक्षा के कोई इंतजाम। शहर के औद्योगिक संस्थाओं की स्थिति तो और बुरी है। शहर में चल रहे लकड़ी के टालों में हजारों मीट्रिक टन लकड़ी डंप है, लेकिन आग से सुरक्षा के लिए एक बाल्टी बालू तक नहीं। एेसे में यदि जिला प्रशासन द्वारा जल्द ही औद्योगिक संस्थानों की सुरक्षा ऑडिट कराकर इन्हें सीज नहीं किया गया तो शहर में कभी भी दिल्ली जैसा बड़ा हादसा हो सकता है।
Updated on:
10 Dec 2019 01:31 am
Published on:
10 Dec 2019 01:31 am
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