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आबादी क्षेत्र में 50 से अधिक कारखाने, सुरक्षा के नाम पर एक फायर सिलेंडर तक नहीं

दिल्ली हादसे के बाद टटोली सतना की नब्ज तो सामने आई कड़वी सच्चाई

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Firebrigade

सतना. दिल्ली में हुए अग्नि हादसे में आधा सैकड़ा लोगों के जिंदा जल जाने के बाद देशभर में फायर सेफ्टी को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विंध्य की औद्योगिक राजधानी सतना में फायर सेफ्टी का कितना पालन हो रहा है, रविवार को जब इसकी पड़ताल की गई तो शहर आग के ढेर पर खड़ा नजर आया। स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे सतना शहर में कारखानों से लेकर स्कूल, कॉलेज या होटलों में फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं मिले। चौंकाने वाली बात यह है कि शहर के अंदर आबादी के बीच अवैध रूप से 50 से अधिक कारखाने एवं एक दर्जन आरा मशीनंे संचालित हैं पर आग के लिए सबसे संवेदनशील इन कारखानों में फायर सेफ्टी के लिए न आपातकालीन निकासी द्वार है, न कोई दूसरे इंतजाम।
रहवासी क्षेत्रों में फायर सेफ्टी के इंतजाम को ठेंगा दिखाकर संचालित कारखाने एवं बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतों में आग से सुरक्षा के लिए फायर किट तो दूर एक फायर सिलेंडर तक नहीं है। जहां कहीं फायर सिलेंडर हैं वे एक्सपायरी हो चुके हैं। इसकी पोल विगत छह माह में फायर विभाग द्वारा की गई कारखानों एवं होटलों की जांच में खुल चुकी है। एेसे में यदि आग लगी तो सतना में दिल्ली से भी बड़ा अंजाम हो सकता है।
फायर एनओसी के बिना चल रहे उद्योग

स्मार्ट सिटी आग से कितनी सुरक्षित है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि शहर में संचालित कारखाने, व्यावसायिक भवन, कोचिंग सेंटर या फिर होटल किसी के पास भी फायर एनओसी नहीं है। बिना फायर एनओसी के चल रहे कारखाने एवं प्रतिष्ठानों में आने वाले ग्राहक एवं कर्मचारियों की आग से सुरक्षा भगवान भरोसे है। कई कारखाने एेसे भवनों में संचालित हैं जहां आग लगने पर दमकल गाडि़यां मौके तक नहीं पहुंच सकतीं। इसके बाद भी आज तक इन कारखानों की न जांच हो पाई और न प्रशासन द्वारा आग से सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए।

निगम का ऐसा है दमकल बेड़ा... 07वाहन, 05 खराब
आग से सेफ्टी को लेकर न कारखाना संचालक गंभीर हैं और न प्रशासनिक अधिकारी। शहर की 3 लाख आबादी की आग से सुरक्षा की जिम्मेदारी निगम प्रशासन की है पर निगम आग बुझाने को लेकर बिल्कुल भी तैयार नहीं है। वर्तमान में निगम के दमकल बेडे़ में कुल सात फायर ब्रिगेड वाहन हैं। इनमें से पांच वाहन खराब हैं। एक मिनी फायर गाड़ी है, जिसका उपायोग बड़े आग्नि हादसों में नहीं किया जा सकता। ऐसे में शहर की सुरक्षा निगम के एक दमकल वाहन पर है। यदि शहर में एक साथ दो स्थानों पर आग लग जाए तो निगम आग बुझाने के लिए दमकल वाहन का प्रबंध भी नहीं कर सकता।

अनाड़ी हाथों में दमकल गाडि़यां, कैसे बुझेगी आग

नगर निगम के फायर स्टेशन में न आग बुझाने के अत्याधुनिक उपकरण हैं और न मशीनें। फायर स्टेशन में कर्मचारियों की उपलब्धता की बात की जाए तो आग बुझाने की जिम्मेदारी अनाड़ी हाथों में है। सात गाडि़यों पर फायर स्टेशन में सिर्फ चार प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात हैं। फायर स्टेशन में ५० फायर कर्मचारियों की जरूरत है। इसके मुुकाबले मात्र 22 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से 18 कर्मचारी निगम के मस्टर कर्मचारी हैं, जिन्हें आग बुझाने का कोई तजुर्बा नहीं है।

तालाबंदी तक सीमित कार्रवाई
एक वर्ष पूर्व सूरत के एक कोचिंग सेंटर में भड़की आग के बाद हरकत में आई प्रदेश सरकार ने जिले के सभी कोचिंग सेंटर एवं होटल, कारखानों में फायर सेफ्टी जांच के निर्देश दिए थे। निगमायुक्त के निर्देश पर शहर में फायर अधिकारी ने आधा सैकड़ा से अधिक प्रतिष्ठानों की जांच कर फायर सेफ्टी मानकों की जांच की थी लेकिन शहर में एक भी कोचिंग सेंटर एवं कारखानों में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं मिले। फायर अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कोचिंग सेंटरों एवं शहर में संचालित आरा मशीनों में तालाबंदी भी की पर प्रशासन द्वारा मामले में किसी भी प्रकार की रुचि न लेने से पूरी कार्रवाई तालाबंदी तक सीमित रही।
शहर में आबादी क्षेत्र में कई कारखाने संचालित हैं। इनके पास न फायर एनओसी है, न आग से सुरक्षा के कोई उपकरण। यदि शहर में कोई बड़ा अग्नि हादसा होता है तो फायर स्टेशन पर उपलब्ध उपकरणों से समय रहते काबू पाना संभव नहीं है। आग को लेकर न व्यापरी जागरुक हैं और न प्रशासन गंभीर। शहर में बिना फायर एनओसी के बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों को भवन अनुज्ञा जारी की जा रही है, यह बहुत ही गंभीर मामला है।

आरपी सिंह परमार, फायर अधिकारी, नगर निगम