विशेषज्ञ टीम यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि गोली किस स्थान से चलाई गई, उसकी दिशा क्या थी और घटना के समय परिस्थितियां कैसी थीं। घटना के तुरंत बाद फोरेंसिक वैज्ञानिक उपलब्ध नहीं होने के कारण उचेहरा पुलिस ने स्वयं मौके की जांच कर खून के नमूने, चार कारतूस के खोखे और इस्तेमाल की गई बंदूक जब्त की थी। घटनास्थल को सील कर दिया गया था। अब टीम दीवारों, वाहनों और अन्य वस्तुओं पर मौजूद निशानों का परीक्षण करेगी। बैलिस्टिक जांच के जरिए हथियार और फायरिंग की परिस्थितियों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। जांच में ये साफ़ हो सकेगा कि फायरिंग किस स्थिति में की और गोली चलाने की ट्रेजेक्ट्री क्या थी।