
Shri Ram idol missing: 11 साल बाद दमोह के बड़ी मंदिर शाला से गायब हुई श्रीराम की बेशकीमती मूर्ति (फोटो सोर्स- Patrika)
Badi Mandir Shala statue dispute: मध्य प्रदेश के दमोह जिले के सीतानगर स्थित बड़ी मंदिर शाला एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। वर्ष 2015 में भगवान वनवासी श्रीराम की कथित बेशकीमती प्रतिमा चोरी होने का मामला अभी तक अनसुलझा है, वहीं अब इसी मंदिर से भगवान श्रीराम की पीले रंग की धातु से निर्मित प्रतिमा के गायब होने का मामला सामने आया है। इस संबंध में गढ़ाकोटा की मंदिर शाला के महंत हरिदास महाराज ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपकर प्रतिमा को खुर्दबुर्द किए जाने का आरोप लगाया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह ने बताया कि मामला पुलिस के संज्ञान में है और जांच जारी हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिमा के मंदिर से गायब होने तथा उसके दूसरी शाला में स्थापित होने के दावों सहित सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सीतानगर शाला वर्ष 2015 में भी उस समय सुर्खियों में आई थी, जब यहां से भगवान वनवासी श्रीराम की कथित काले नीलम पत्थर की परिस्थितियों में चोरी हो गई थी। घटना के वर्षों बाद भी उस प्रतिमा का कोई सुराग नहीं मिल सका। उस समय चोर प्रतिमा को उसके आधार से अलग कर ले गए थे और मौके पर केवल कृत्रिम रूप से लगाए गए पैर ही मिले थे। मामले की जांच आज तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाई है।
महंत हरिदास महाराज ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि सीतानगर शाला से भगवान श्रीराम की प्रतिमा बिना स्पष्ट जानकारी के गायब कर दी गई है। उन्होंने सीतानगर शाला के महंत संतोष दास पर प्रतिमा को खुर्दबुर्द करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनचर्चा के अनुसार प्रतिमा स्वर्ण धातु की बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार सीतानगर की बड़ी शाला में वर्षों से स्थापित यह प्रतिमा नियमित रूप से श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजन का केंद्र रही है। लेकिन 23 मई के बाद लोगों ने देखा कि भगवान के सिंहासन से प्रतिमा गायब है। इसके बाद क्षेत्र में चर्चा शुरू हुई और मामला गढ़ाकोटा के महंत हरिदास महाराज तक पहुंचा। उन्होंने 12 जून को दमोह पहुंचकर पुलिस अधीक्षक को आवेदन सौंपा।
ताजा विवाद में सबसे बड़ा प्रश्न प्रतिमा को कथित रूप से दूसरी शाला में भेजने की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि यदि प्रतिमा को विधिवत स्थानांतरित किया गया था, तो इसकी सार्वजनिक जानकारी क्यों नहीं दी गई और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप अनुष्ठान तथा औपचारिक प्रक्रिया का पालन किस प्रकार किया गया। इन सभी बिंदुओं पर अब पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के दावों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
मामले में नया मोड़ तब आया जब सीतानगर शाला के महंत संतोष दास ने प्रतिमा चोरी होने से इनकार किया। उनका कहना है कि संबंधित प्रतिमा को जिले के ऊमर झिरिया स्थित शाला में स्थापित किया गया है। उनके अनुसार यह प्रतिमा मूल रूप से कुटरी गांव के मिश्रा परिवार की अमानत थी और नए मंदिर के निर्माण के बाद परिवार के आग्रह पर उसे वहां भेजा गया। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन महंत हरिप्रसन्नदास महाराज ने भी प्रतिमा के स्वामित्व को लेकर यही जानकारी दी थी।
मूर्ति चोरी होने के संबंध में मंदिर समिति के कुछ लोग आए थे। मैंने मामले की जांच के लिए नरसिंहगढ़ चौकी प्रभारी को निर्देशित कर दिया है। जांच की जा रही है।- आनंद कलादगी, एसपी दमोह
Published on:
14 Jun 2026 10:02 pm
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