
Death of 2 children: बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन (Photo Source - Patrika)
Damoh news: बीता दिन दो परिवारों के लिए बेहद दुखद रहा। पढ़ने के लिए स्कूल गए दो बच्चे वापस घर नहीं लौटे। घर पर इंतजार कर रही उनकी मां को बच्चों की मौत की जानकारी मिली तो पूरे घर में कोहराम मच गया। बता दें कि पढ़ने के लिए स्कूल गए दो बच्चे लंच टाइम में 15 फीट गहरे गड्ढे में डूब गए। दोनों नाबालिग बच्चों की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में गहरा शोक और ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने गांव के ही एक व्यक्ति पर गड्ढा खुदवाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी मिली है कि मृतक बच्चों की पहचान 10 वर्षीय सोनू पिता लखन यादव और 11 वर्षीय भविष्य पिता संजू यादव के रूप में हुई है। सोनू पांचवीं कक्षा का छात्र था, जबकि भविष्य छठवीं कक्षा में पढ़ता था। दोनों बच्चों के शव जब उनके घर पहुंचे तो पूरा गांव रो उठा। उससे पहले हटा सिविल अस्पताल का माहौल गमगीन हो गया। दोनों मासूमों के शव अस्पताल पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से हर आंख नम हो गई। मां अपने बच्चों को सीने से लगाने की कोशिश करती रही, बार बार यही बोलती रही कि मैं कैसे जिउंगी, जबकि पिता बेसुध होकर फूट-फूटकर रोते रहे।
अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों के लिए भी यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। पूरे गांव से पहुंचे लोग परिजनों को सांत्वना देते रहे, लेकिन किसी के पास उनके दर्द का कोई जवाब नहीं था। दोनों बच्चों का शाम के अंतिम संस्कार किया गया। दोनों बच्चों के घरों में मंगलवार को भी लोगों का आना जाना लगा हुआ है। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच में यदि किसी भी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
बताया जा रहा है कि स्कूल में लंच टाइम बच्चों के लिए काल बन गया। इसी समय बच्चे खेलते-खेलते गड्ढा के पास आ गए। स्कूल के ठीक सामने खुदे हुअ इस गड्ढे में करीब 15 फीट पानी भरा हुआ था। दोपहर जब स्कूल में लंच की छुट्टी हुई, तब दोनों बच्चे गड्ढे के पास खेलने गए। खेलते समय वे उसमें डूब गए। वहां मौजूद कुछ अन्य बच्चों ने उन्हें डूबते हुए देखा तो जोर-जोर से चिल्लाकर आवाज लगाई। इसके बाद परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और परिजनों को भी सूचना दी। सभी लोग मौके पर पहुंचे ग्रामीण गड्ढे में कूदे और दोनों बच्चों को गहराई से बाहर निकाल कर हटा सिविल अस्पताल लाया गया।
ग्रामीणों के अनुसार, इसे करीब दो वर्ष पहले पेट्रोल पंप निर्माण के लिए खोदा गया था। निर्माण आगे नहीं बढ़ा और गड्ढा खुला ही छोड़ दिया गया। बरसात में इसमें करीब 15 फीट तक पानी भर गया, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह है कि गड्ढा स्कूल के ठीक सामने दो सौ फीट दूरी पर बना था, जहां रोजाना सैकड़ों बच्चे आते-जाते थे। इसके बावजूद न बैरिकेडिंग की गई, न चेतावनी बोर्ड लगाए गए और न ही गड्ढे को भरने की पहल हुई।
ग्रामीणों का दावा है कि इस खतरे की जानकारी कई बार जिम्मेदारों को दी गई थी। जांच में यह सामने आना बाकी है कि गड्ढा किसकी निगरानी में था और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी। यदि पेट्रोल पंप निर्माण के लिए खुदाई हुई थी, तो यह भी देखा जाएगा कि निर्माण एजेंसी या संबंधित पक्ष ने सुरक्षा मानकों का पालन किया या नहीं। वहीं स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है, यदि पहले शिकायतें होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पेट्रोल पंप निर्माण की अनुमति कब और किसे मिली ?
दो साल से गड्ढा खुला क्यों पड़ा था?
स्कूल के सामने सुरक्षा घेरा और चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए?
शिकायतें हुई थीं तो उन पर क्या कार्रवाई हुई?
भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा?
Updated on:
28 Jul 2026 01:28 pm
Published on:
28 Jul 2026 01:28 pm
